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छह हजार पगार वाले कर्मचारी बने फर्म के मालिक, पुलिस ने खुलासा किया तो रह गए हैरान

Mon, 17 Aug 2020 12:18 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • फर्जी फर्म बनाकर किया 1.5 करोड़ रुपये का लेनदेन, मास्टरमाइंड गिरफ्तार 
  • मास्टरमाइंड ने छह बैंकों में खोल रखे थे खाते, जीएसटी की चोरी की जा रही थी
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
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विस्तार
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आगरा में थाना हरीपर्वत पुलिस ने फर्जी फर्म चलाने के आरोप में व्यापारी जितेंद्र अग्रवाल को गिरफ्तार किया है। उसने छह-छह हजार रुपये पगार वाले कर्मचारियों के नाम से फर्जी फर्म बनाकर सात बैंक खाते खुलवाए। इनमें 1.5 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन कर चुका था। थाना प्रभारी निरीक्षक अजय कौशल ने बताया कि आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर 8 निवासी जितेंद्र अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया है। उसका कार्यालय संजय प्लेस में था।

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रकाबगंज के चक्की पाट निवासी सचिन ने शिकायत की थी कि उसे छह हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी पर रखकर उसके नाम से एक फर्म खोली और उसका चालू खाता एक्सिस बैंक में खुलवाया। बाद में एचडीएफसी और बंधन बैंक में भी खाते खुलवाए। इसी तरह कर्मचारी मनीष के नाम से आईसीआईसीआई बैंक मुंबई, एक्सिस बैंक, बंधन बैंक में खाते खुलवाए। बाद में सचिन के परिचित संतोष और वीरेंद्र के नाम से फर्जी फर्म और फर्जी खाते खुलवाए। इनसे दूसरी फर्मो का लेनदेन किया जा रहा था।


कर्मचारियों की शिकायत पर पकड़ा

सचिन, मनीष, संतोष और वीरेंद्र को बैंक से पता चला कि उनके नाम से खुलवाए खातों में बड़ी संख्या में लेन-देन हो रहा है। यह लेन-देन जीएसटी की चोरी करने के लिए किया जा रहा है। सचिन ने एसएसपी ऑफिस में शिकायत की। मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को लगाया गया। साक्ष्य मिलने पर जितेंद्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। शनिवार को उसे हिरासत में ले लिया गया। पुलिस का कहना है कि 1.5 करोड़ से अधिक का लेन देन हुआ है। लाखों की जीएसटी चोरी का अनुमान है। जीएसटी अफसरों को सूचना दे दी है।

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कबाड़ा कारोबारियों का है एजेंट

थाना हरीपर्वत के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि जितेंद्र ने कबाड़ व्यापारियों के लिए ही फर्जी फर्म बनाई हैं। वो एजेंट के रूप में कार्य करता था। वो फर्म का माल खरीदकर आगे के व्यापारियों को दे देता है। जो जीएसटी बचता है, उस पर कमीशन तय रखता है। जीएसटी बचने के कारण व्यापारी को माल कम दाम में मिल जाता है। जिन चीजों पर टैक्स नहीं है, या बहुत कम है, उनके नाम से बिल बना दिए जाते हैं।

ठेल और फड़ विक्रेताओं के नाम पर भी फर्म

पुलिस की जांच में पता चला कि आरोपी कम पढ़े लिखे लोगों को अपने झांसे में लेता था। ठेल और फड़ विक्रेताओं को बताता था कि उन्हें सरकारी लाभ मिलेगा। इसके बाद खाते खुलवा लेता था। उनके नाम से फर्म भी बना लेता था। खाता खुलने पर लेन-देन करता था।

एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि आरोपी फर्म की फर्जी रसीद का प्रयोग करता था। अब यह पता किया जा रहा है कि कितने खाते खुलवाए गए। इनमें कितना जीएसटी चोरी किया गया। 
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