जैतपुर के गढ़ी रम्पुरा के पूर्व सैनिक रामदास और धर्मवीर समेत चार और की बुखार से पीड़ित होने के चलते मौत हो गई। पूर्व सैनिक 1965 और 1971 की जंग में पाकिस्तान के खिलाफ लडे़ थे। शनिवार रात रामदास की बुखार और धर्मवीर की निमोनिया के संक्रमण से जान चली गयी।
गढ़ी रम्पुरा गांव के पूर्व सैनिक सूबेदार रामदास और इसी गांव के धर्मवीर पाकिस्तान के खिलाफ जंग में शामिल हुए थे। रामदास को रक्षा मेडल, समरसेवा मेडल और धर्मवीर को युद्ध कौशल व सैन्य सेवा मेडल मिला था। धर्मवीर की पत्नी महादेवी और रामदास की पत्नी धनवती ने बताया कि वे पठानकोट और उड़ी हमले से काफी दुखी थे। रामदास को दो दिन पहले बुखार आया था। आगरा ले जाने के दौरान शनिवार रात उनकी मौत हो गयी। रामदास की छह बेटियां ही थीं, कोई पुत्र नहीं था। वहीं, निमोनिया से हालत बिगड़ने पर चार दिन पहले धर्मवीर को आगरा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी भी शनिवार रात को मौत हो गयी।
जैतपुर के नौगवां में रविवार शाम तुरई (13) पुत्र बसंत सिंह को चार दिन से बुखार आ रहा था। जैतपुर सीएचसी से आगरा ले जाते समय उसकी रास्ते में मौत हो गयी। गांव में कई और लोग भी बीमार हैं। वहीं, पिनाहट के गांव धर्मसिंह का पुरा बड़ौस निवासी योगेन्द्र (14) पुत्र महेश चंद्र को एक सप्ताह से बुखार आ रहा था। परिजन झोलाछाप से इलाज कराते रहे। रविवार को सीएचसी बाह में डेंगूू की पुष्टि की गई। डॉक्टरों ने आगरा रेफर कर दिया। आगरा ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई।