टूरिज्म गिल्ड के अध्यक्ष हरी सुकुमार ने कहा कि पर्यटन उद्योग के लिए बेहद निराशाजनक बजट है। एक साल से इंडस्ट्री में ताले लगे हैं, जबकि अन्य उद्योग फिर भी पटरी पर आने लगे। पर्यटन को दोबारा पैरों पर खड़ा करने की कोई बात तक बजट में नहीं की गई।
होटल एंड रेस्टोरेंट ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश वाधवा ने कहा कि जो सबसे ज्यादा कोरोना काल में परेशान हुए, उनकी बजट में कोई बात नहीं की। सरकार के एजेंडे में पर्यटन विकास है ही नहीं। पांच साल के बजट में देखिए, पर्यटन इनकी प्राथमिकता में है ही नहीं।
होटल एसोसिएशन के महासचिव अवनीश शिरोमणि ने कहा कि इस बजट में भी पर्यटन उद्योग के साथ छलावा किया गया। न कोई टैक्स में राहत न ही कोई पैकेज। हर सेक्टर को कुछ न कुछ मिला है, केवल पर्यटन की झोली खाली रही। 10 फीसदी जीडीपी हिस्सेदारी वाले उद्योग को दरकिनार कर किया।
इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स सुनील सी. गुप्ता ने कहा कि बड़ी उम्मीदें थीं, जो चकनाचूर हो गईं। पर्यटन को कुछ तो राहत दी होती। लाखों लोग बेहाल हैं। होटल, एंपोरियमों, रेस्टोरेंटो में एक साल बाद भी ताले हैं, पर सरकार इन सबको लेकर संजीदा नहीं, बजट में कोई प्रावधान नहीं किया।
आम बजट में लेदर पर आयात शुल्क बढ़ाने से जूता निर्यात उद्योग को बड़ा झटका लगा है। लॉकडाउन के कारण पहले ही कराह रहे उद्यमियों को राहत मिलने के बजाय उनपर और बोझ डालने का काम किया है। शुल्क बढ़ने से जूते की लागत में इजाफा होगा, साथ ही बांग्लादेश जैसा छोटा देश निर्यात के मामले में और आगे निकल सकता है।
आगरा शू मैन्यूफेक्चरर एसोसिएशन के अध्यक्ष उपेंद्र सिंह ने बताया कि जूते को बनाने में वेट ब्लू लेदर और अनफिनिश्ड लेदर का प्रयोग होता है। इसे रशिया, बंगलादेश आदि देशों से आयात किया जाता है। अभी तक इस पर शुल्क नहीं लग रहा था। लेकिन अब इस पर 10 फीसदी की देयता होगी। ऐसे में कच्चा माल महंगा मिलने से जूते की लागत 20 फीसदी तक बढ़ जाएगी। ऐसा होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हम अपने सबसे बड़े प्रतिस्पर्धी बांग्लादेश से और पीछे छूट जाएंगे। जिसका निर्यात हमसे काफी ज्यादा है।
आगरा में कारोबार
- 150 जूता निर्यात इकाई
- 3 लाख लोगों को रोजगार
- 3375 करोड़ रुपये का निर्यात
- लॉकडाउन से 1500 करोड़ रुपये का नुकसान