सीमा 2009 में चुनाव जीती थीं। उस वक्त प्रदेश में बसपा की सरकार थी। वहीं 2014 में दोनों ही सीटों पर सपा तीसरे स्थान पर रही थी। जबकि बसपा तीसरे नंबर पर। इस बार तीसरे और दूसरे स्थान पर रहे दलों का गठबंधन होने गया है। ऐसे में यह दोनों सीटें बसपा के खाते में पक्की मानी जा रही हैं।
आगरा सीट पर 2014 का परिणाम
| पार्टी |
प्रत्याशी |
वोट मिले |
प्रतिशत में |
| भाजपा |
रामशंकर कठेरिया |
582716 |
54.53 |
| बसपा |
नारायण सिंह सुमन |
283453 |
26.48 |
| सपा |
महाराज सिंह |
134708 |
12.58 |
| कांग्रेस |
उपेंद्र सिंह |
34834 |
3.25 |
आगरा लोकसभा सीट कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी। बाद में भाजपा का गढ़ बन गई। बीच में दो बार सपा की साइकिल चली। यह सीट 1957 से 2004 तक अनारक्षित रही। 1957 से 1971 तक लगातार तीन बार कांग्रेस के सेठ अचल सिंह जीते। 1977 में बीएलडी के शंभूनाथ चतुर्वेदी सांसद बने।
1980 में निहाल सिंह कांग्रेस आई के टिकट पर जीते, 1984 में कांग्रेस के। 1989 में जनता दल से अजय सिंह सांसद बने। 1991, 1995, 1998 में लगातार तीन बार भाजपा के भवानी शंकर रावत जीते। 1999 और 2004 में सपा के राज बब्बर जीते। 2009 में सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित हो गई। तब और 2014 में भाजपा के रामशंकर कठेरिया जीते।
फतेहपुर लोकसभा सीट का गठन 2009 के परिसीमन में हुआ। पहले चुनाव में बसपा की सीमा उपाध्याय जीतीं। दूसरे में भाजपा के चौधरी बाबूलाल जीते। 2009 से पहले आगरा जनपद की पांच विधान सभा सीटें आगरा लोकसभा क्षेत्र में थीं। अन्य चार सीटें फिरोजाबाद लोकसभा क्षेत्र में थीं।
फतेहपुर सीकरी पर 2014 का परिणाम
| पार्टी |
प्रत्याशी |
वोट मिले |
प्रतिशत में |
| भाजपा |
चौधरी बाबूलाल |
426589 |
44.06 |
| बसपा |
सीमा उपाध्याय |
253483 |
26.18 |
| सपा |
पक्षालिका सिंह |
213397 |
22.04 |
| रालोद |
अमर सिंह |
24185 |
2.50 |
बसपा जिलाध्यक्ष डॉ भारतेंदु अरुण ने कहा कि गठबंधन की स्थिति में हमारे प्रत्याशियों की जीत का अंतर काफी होगा। दोनों ही सीटें भारी अंतर से जीतेंगे, क्योंकि अब भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर काम कर रहा है। हमारी तैयारी पूरी है।