बसपा के पार्षदों ने नाले में उतर कर विरोध प्रदर्शन करके चेतावनी दी है कि विरोधी दलों के पार्षदों के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं होगा।
एक सप्ताह में रुके हुए विकास कार्य, निर्माण कार्य शुरू नहीं किए गए तो शहर के चौराहों पर कटोरा लेकर भीख मांगेंगे, ताकि जनता के
लिए विकास कार्य करा सकें।
47 लाख रुपये की लागत से राजनगर नाले की मरम्मत का काम स्वीकृत होने के बाद निरस्त कर देने के मामले में बसपा के पार्षदों ने मंगलवार को पुल छिंगा मोदी नाले में उतर कर प्रदर्शन किया।
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चेतावनी दी कि एक सप्ताह के अंदर नाले की मरम्मत का काम शुरू नहीं किया गया तो वे जनता के बीच जाकर भीख मांगेंगे और उससे मिली रकम से नाले की मरम्मत कराएंगे। पार्षदों ने नगर आयुक्त के कार्यालय की साज-सज्जा पर हो रहे खर्च पर भी सवाल खड़े किए।
मंगलवार की दोपहर 12 से 1 बजे के बीच राजनगर के पार्षद बंटी माहौर के नेतृत्व में बसपा पार्षद दल के नेता मनोज कुमार सोनी, मिथिलेश, धर्मवीर सिंह, मनोज कुमार, महेश कुमार संवेदी, कृष्ण मोहन समेत अन्य पार्षदों ने नाले में उतर कर प्रदर्शन किया। एक सप्ताह के अंदर टूटे नाले की मरम्मत कराने की मांग की।
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नाले में उतरकर प्रदर्शन करते बसपा पार्षद
- फोटो : अमर उजाला
भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
बसपा के पार्षदों ने नाले में उतर कर विरोध प्रदर्शन करके चेतावनी दी है कि विरोधी दलों के पार्षदों के साथ भेदभाव बर्दाश्त नहीं होगा। एक सप्ताह में रुके हुए विकास कार्य, निर्माण कार्य शुरू नहीं किए गए तो शहर के चौराहों पर कटोरा लेकर भीख मांगेंगे, ताकि जनता के लिए विकास कार्य करा सकें।
पहली बार बसपा पार्षदो ने खोला मोर्चा
आगरा। नगर निगम में बसपा पार्षदों ने पहली बार नगर आयुक्त और मेयर के खिलाफ मोर्चा खोला है। अभी तक सदन के अंदर और सदन के बाहर बसपा के पार्षदों की चुप्पी रही, लेकिन 3 साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। ऐसे में लोगों की उम्मीदें पूरी होते न देख पार्षदों ने अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ना शुरू कर दिया है।
कोरोना के कारण उनके क्षेत्रों में विकास कार्य रुके हुए हैं। निगम भी कई विकास कार्यों को बजट न होने का हवाला देकर रोक चुका है। वहीं लोगों का दबाव पार्षदों पर है। ऐसे में धरना प्रदर्शन और आंदोलन का रास्ता विरोधी दलों के पार्षदों ने अपनाया है।
नगर आयुक्त के कार्यालय की साज-सज्जा के लिए निगम के पास 30 लाख रुपये हैं, लेकिन जनता के लिए नाली और सड़क पर खर्च करने के लिए बजट नहीं है। दलित, गरीब, कमजोर वर्ग की बस्तियों के लिए सड़क, नाले बनाने की जगह दफ्तर चमकाने के लिए पैसा खर्च हो रहा है - बंटी माहौर पार्षद, राजनगर
15 करोड़ रुपये के डस्टबिन खरीद लिए गए, जबकि जरूरत नहीं थी। अब यह कबाड़ हो रहे हैं। इतनी बड़ी रकम से सभी रुके हुए काम पूरे हो सकते थे, जिनका फायदा जनता को होता, लेकिन कमीशन और फिजूलखर्ची के काम निगम के अधिकारी करा रहे हैं। -मिथिलेश पार्षद, नाई की सराय
जरूरत से ज्यादा डस्टबिन खरीद लिए गए। इसी तरह से 1500 रिक्शे फिजूल खरीदे गए जबकि इनकी जरूरत नहीं थी। विकास कार्यों के लिए पैसे की कमी हो रही है। लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। -धर्मवीर सिंह पार्षद, रतनपुरा