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UP: भाई अपनी बहन से राखी ही न बंधवाए..., हास्य कवि वाहे गुरु भाटिया ने क्यों बोला ऐसा, दिल को छू लेगी ये बात

Tue, 29 Aug 2023 09:02 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा

सार

Raksha Bandhan 2023: रक्षाबंधन के पवित्र पर्व की पूरे देश भर में जोरों–शोरों से तैयारियां चल रही हैं। बाजारों में चारों तरफ राखियां हीं राखियां नजर आ रही हैं। लेकिन इस मौके पर हास्य कवि वाहे गुरु भाटिया ने ऐसी बात कह दी जिसे सुनकर आप स्तब्ध रह जाएंगे। उन्होंने कहा बहन अपने भाई को राखी न बांधे। ऐसा उन्होंने क्यों कहा आगे पढ़ें....
 
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रक्षाबंधन के पर्व पर हास्य कवि वाहे गुरु भाटिया का तंज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रक्षाबंधन से पूर्व दिल्ली में लाफ्टर शो करके  101 घंटे का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाले हास्य कवि सिकंदरा स्थित अमर उजाला कार्यालय आए। यहां उन्होंने आगामी पर्व रक्षाबंधन को लेकर गहरा तंज किया। उन्होंने बताया कि किस तरह इस पर्व की गंभीरता को लोग भूलते जा रहे हैं।
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हास्य कवि वाहे गुरु भाटिया ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में लोग इतने भोले होतें हैं कि उन्हें यह भी नहीं पता होता कि कौन सी चीज़ खानी है। मन के साफ होते हैं। वैसे ही पेंटर भी होते हैं। उनके प्रिंट करने वाले भी वैसे ही होते हैं। रूमाल पर लिख देते हैं आई लव यू,  बहन अपने भाई को जो राखी बांधती है, उस पर भी कुछ न कुछ लिखा होता है। ऐसा ही मैंने गांव में देखा है, कि लिख देते हैं हम आपके हैं कौन, राधा–कृष्ण, लेकिन वो अपनी भावनाएं हैं। एक बहन अपने भाई को जो शरहद पर है उसको राखी भेजती है। राखी पर लिखा रहता है हम आपके हैं कौन। तो वहां से मैंने पंक्तियां उठाईं...


 

बहन की राखी पाते ही भाई रह गया मौन,
राखी पर ही लिखा था हम आपके हैं कौन।
लिखने वाले ने कोई कमी न की
राखी पर लिख दिया आशिकी,
इस पवित्र रिश्ते में भी भगवान डाल रहे हैं बाधा,
क्योंकि राखी पर ही लिख कर आ रहा है कृष्ण और राधा।

आगे उन्होंने कहा कि मैं तो उस पल को देखता हूं....
न जाने मेरे देश में ऐसी मोहब्बत कब आएगी,
जब चारों कोम के भाईयों को बैठाकर, एक बहन से राखी बंधवाएगी ।
 
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भाई अपनी बहन से राखी ही न बंधवाए

उन्होंने कहा कि हम इसी पल के लिए तरस रहे हैं। हिंदू अलग हो गया मुसलमान अलग हो गया, राखी का मतलब ही समझना लोगों ने बंद कर दिया। अब तो मेरे ख्याल से भाई अपनी बहन से राखी ही न बंधवाए, पति को बांधे, जब वो रक्षा ही नहीं कर पा रहा है। पति से ही रक्षा नहीं कर पा रहा है। हमने अपनी बहन को विदा कर दिया उसके बाद बहन टूट रही है, पिट रही है, उसके साथ क्या हो रहा है हमें कोई फ़र्क नहीं पड़ता, तो फिर इस रिश्ते का मतलब क्या। फिर तो जैसे रानी अपने राजा को तिलक लगाकर, रक्षासूत्र बांधती है, वैसे ही राखी भी तो रक्षासूत्र ही है।

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