आगरा में बनी अंग्रेजों के जमाने की जेल कैदियों से ओवरलोड हो गई है। यहां क्षमता से दो गुना कैदी हैं। इमरजेंसी के दौर में इसे नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया था लेकिन वहां भी अब कैदियों के बैठने तक को जगह नहीं है।
सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने सूचना का अधिकार के तहत पांचों केंद्रीय कारागारों के बारे में जानकारी इकट्ठा की, तब यह चौंकाने वाली जानकारी आई। आगरा के केंद्रीय कारागार में क्षमता से 100 फीसदी ज्यादा कैदी हैं। क्षमता 1050 कैदियों की हैं जबकि रखे गए हैं लगभग 2100 कैदी।
कारागार विभाग ने उन्हें जो रिपोर्ट दी है, वह 30 अप्रैल तक की है। इसके मुताबिक ,केंद्रीय कारागार में 1815 सजायाफ्ता और 15 विचाराधीन कैदी हैं। इसके बाद लगभग 300 कैदी एक महीने में और बढ़ चुके हैं। जेल सूत्रों का कहना है कि अब 2100 कैदी हो गए हैं।
नूतन ठाकुर को सभी सेंट्रल जेलों की 30 अप्रैल तक जानकारी दी गई है। इसके अनुसार प्रदेश की पांचों केंद्रीय कारागारों आगरा, बरेली, नैनी ( इलाहाबाद), फतेहाबाद और वाराणसी में कैदियों को रखने की क्षमता 7438 पुरुष, 60 महिला और 120 अल्प वयस्क कैदियों की है। इसके मुकाबले 11470 कैदी रखे गए हैं। इनमें 11211 पुरुष, 96 महिला, 126 अल्पव्यस्क, 27 विदेशी और 13 अन्य कैदी हैं। यह आंकड़ा क्षमता से 50 फीसदी अधिक है। नैनी जेल की क्षमता 2060, बरेली 2053, आगरा की 1050 है।
क्षमता से अधिक कैदी रखे जाने से उन्हें परेशानी होती है। बैरक में भी कैदी ठूंस दिए जाते हैं। उन्हें सोने और बैठने के लिए कम जगह मिलती है। इससे बीमारियां भी होती हैं। बता दें, पिछले साल आगरा केंद्रीय कारागार के कैदियों ने एक महीने भूख हड़ताल की थी। इसमें मुख्य मुद्दा बुजुर्ग कैदियों की रिहाई का था।
साथ ही कैदियों की सुविधाओं की मांग की गई थी। क्षमता से अधिक कैदी रखे जाने का भी विरोध किया गया था। तब कैदियों को मनाने के लिए तत्कालीन कारागार मंत्री बलवंत सिंह अहलूवालिया भी कारागार में उनसे मिलने के लिए आए थे। इसके बावजूद हालात नहीं बदले।
अधीक्षक केंद्रीय कारागार एसएचएम रिजवी का कहना है कि आगरा कारागार में नई बैरकों का निर्माण कार्य चल रहा है। यह जल्द ही पूरा हो जाएगा। इसके बाद स्थिति कुछ सुधर जाएगी।