धर्मांतरण का मामला जिस तरह अभी पूरे देश में चर्चाओं में है, ऐसी ही मामला वर्ष 1954 में भी सुर्खियों में रहा था। आगरा के वाल्मीकि परिवार के बृज मोहन धर्म परिवर्तन के बाद दीन मोहम्मद हो गए थे। वहीं धर्म परिवर्तन के लिए एक छात्रा को इस कदर मजबूर कर दिया गया था कि वो तो अपनी जान देने तक पर उतारू हो गई थी।
आगरा के सदर क्षेत्र की दो सगी बहनों के धर्मांतरण का मामला पूरे देश में चर्चाओं में है। कारोबारी की दो बेटियों के अवैध धर्मांतरण मामले के साथ ही बलरामपुर के जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पर की जा रही कार्रवाई से धर्मांतरण नेटवर्क के बारे में हर दिन नया खुलासा हो रहा है। अमर उजाला के पुराने पन्नों को खंगालने पर आगरा-मथुरा में 75 साल से रचे जा रहे धर्मांतरण के चक्रव्यूह का पता चलता है। आजादी के बाद से ही उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण के कई बड़े मामले पूरे देश में चर्चा का केंद्र बने।
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आजादी के बाद वर्ष 1950 से धर्म बदलने के केस सामने आने लगे थे। वर्ष 1954 में 10 अप्रैल को अमर उजाला में मथुरा में धर्मांतरण की खबर प्रकाशित हुई, जिसने उत्तर प्रदेश की सरकार को सफाई देने पर मजबूर कर दिया। तत्कालीन गृहमंत्री संपूर्णानंद ने मथुरा में धर्मांतरण की जांच कराई, जिसके बाद उन्होंने विधानसभा में जवाब दिया कि मथुरा में 250 लोगों ने धर्म परिवर्तन किया है। यह संख्या सरकारी थी, जबकि मथुरा में तब बड़े पैमाने पर मिशनरियों ने धर्म परिवर्तन कराया था, जिसे छिपा लिया गया। मथुरा में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के मामले के बाद केंद्र सरकार ने घोषणा की कि धर्म परिवर्तन कराने की अब कोई इजाजत नहीं होगी।
1993 में बृजमोहन बन गए दीन मोहम्मद
13 मार्च 1993 को अमर उजाला में प्रकाशित धर्मांतरण का मामला पूरे देश में चर्चाओं में आ गया। आगरा के वाल्मीकि परिवार के बृज मोहन धर्म परिवर्तन के बाद दीन मोहम्मद हो गए थे। दो साल बाद उनके धर्मांतरण का खुलासा हुआ, तो हंगामा हो गया। तब एक माह तक यह मामला चर्चाओं में रहा और वाल्मीकि समाज ने सड़क पर लगातार इसके खिलाफ प्रदर्शन किए। बृज मोहन, उसकी पत्नी और बेटी इंदिरा समेत कई अन्य परिवारों का तत्कालीन शहर मुफ्ती अब्दुल कद्दूस रूमी ने धर्मांतरण कराया था।
25 साल पहले सेंट जोंस की छात्रा का गरमाया था मामला
12 अप्रैल 2000 को अमर उजाला में सेंट जोंस की छात्रा सरिता के धर्मांतरण के कथित प्रयासों का मामला छाया रहा था। सेंट जोंस कॉलेज की छात्रा सरिता ने आरोप लगाया था कि कॉलेज प्रबंधन ने दवाब डालकर उसे धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया, जिस पर उसने आत्महत्या का प्रयास किया था। तब यह मामला भाजपा नेताओं ने उठाया। पूरे पखवाड़े यह मामला सुर्खियों में बना रहा था।