करीब 50 गांव के लोगों को पुल निर्माण नहीं होने से 25 किमी चक्कर लगाना पड़ता है। आनंदी भैरों से डेरा बंजारा तक यमुना नदी पर 2023 में स्वीकृत हुए पुल निर्माण के लिए एक ईंट तक नहीं रखी जा सकी। उधर, रेणुका धाम के पास यमुना नदी पर रुनकता को बल्देव मार्ग से जोड़ने वाले पुल के सिर्फ पिलर खड़े हो सके। यह पुल भी हवा में लटका है।
लेटलतीफी के कारण इस पुल की लागत 24.03 करोड़ रुपये बढ़ गई। दक्षिणी बाईपास पर आरओबी की लागत में 17.92 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। जबकि रुनकता से रोहता मार्ग को जोड़ने वाले आरओबी निर्माण की लागत 20 करोड़ रुपये बढ़ चुकी है। रावली मंदिर आरओबी की लागत 9.13 करोड़ रुपये बढ़ चुकी है।
इन पुलों का निर्माण लटका
- यमुना नदी पर आनंदी भैरों से डेरा बंजारा गिजौली मार्ग पर 111 करोड़ रुपये से पुल का निर्माण 16 नवंबर 2023 को स्वीकृत हुआ। 31 दिसंबर 2026 तक निर्माण पूर्ण होना है। काम शुरू नहीं हुआ।
- यमुना नदी पर रेणुका धाम के पास रुनकता से बल्देव मार्ग को जोड़ने के लिए 35.58 करोड़ रुपये से पुल निर्माण अक्तूबर 2020 में स्वीकृत हुआ। 30 जून 2025 तक काम पूरा होना था। सिर्फ पिलर खड़े हुए। लागत 24.03 करोड़ बढ़कर अब 59.41 करोड़ हो गई है।
- एनएच-2 को एनएच-3 से जोड़ने के लिए रुनकता से रोहता मार्ग दक्षिणी बाईपास रेल फाटक 11सी-2टी का निर्माण 1 फरवरी 2019 को 60.09 करोड़ से स्वीकृत हुआ। 28 फरवरी 2025 तक काम पूरा होना था। लागत बढ़कर 78.01 करोड़ रुपये हो चुकी है।
- एमजी रोड पर रावली मंदिर के पास आरओबी निर्माण 1 जून 2010 को 10.82 करोड़ से स्वीकृत हुआ। लागत बढ़कर अब 19.95 करोड़ पहुंच गई। 50 फीसदी पुल का निर्माण का पीडब्ल्यूडी ने दावा किया है। 31 दिसंबर 2025 को पुल निर्माण पूरा होना है।
शासन को भेजा है पत्र
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने बताया कि पुलों के निर्माण की समीक्षा की गई है। बजट व अन्य बिंदुओं पर शासन को पत्र भेजा है। संबंधित विभागों से भी जवाब मांगा जाएगा।
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