ब्रज में होली के रंगों का उल्लास अद्भुत है। होली के इस आनंद की अनुभूति के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक मथुरा आते हैं। इस दौरान पर्यटकों का आकर्षण बरसाना की लठामार होली के साथ रंगभरनी एकादशी को वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर में उड़ने वाले रंग तक सीमित रहता है। लेकिन इस बार होली के उत्सव को और व्यापक तथा भव्य बनाने की योजना शुरू हो गई है।
कहावत है सब जग होरी या ब्रज होरा। ब्रज में पूरे 40 दिन तक होली के रंग बरसते हैं। कहीं रंगों से खेलते हैं तो कहीं फूलों से होली होती है। मंदिरों में तो यहां प्रत्येक दिन होली के खास आयोजन किए जाते हैं। बरसाना, बांकेबिहारी और श्रीकृष्ण जन्मस्थान की होली को छोड़ दें तो अधिकांश आयोजन स्थानीय बनकर रह गए हैं।
वहां तक पहुंचने के लिए भी कोई इंतजाम नहीं होते है। जनसुविधाओं का भी पूरी तरह से अभाव रहता है, लेकिन अब इन्हें पर्यटन मानचित्र पर लाने की प्लानिंग बनाई गई है। इसमें उन सभी आयोजनों की सूची बना ली गई है, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। इस बार तमाम स्थानों पर पुलिस, प्रशासनिक व्यवस्थाओं के साथ आवागमन की सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है।