मथुरा। मंदिर श्रीरंगनाथ के ब्रह्मोत्सव में मंदिर से निकले भगवान रंगनाथ।
- फोटो : VRINDAVAN
वृंदावन (मथुरा)। उत्तर भारत के विशालतम मंदिरों में शामिल श्रीरंगनाथ का दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव बृहस्पतिवार को ध्वजारोहण के साथ शुरू हो गया। मंदिर के सेवायतों ने सर्वप्रथम गरुण स्तंभ पर ध्वजारोहण किया। इसके बाद भगवान रंगनाथ माता गोदा के साथ पूर्ण कोठी में विराजमान हो कर निज मंदिर से निकले।
इस दौरान मधुर वाद्य यंत्रों की ध्वनि के मध्य सवारी के साथ वेदपाठी ब्राह्मण वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए चल रहे थे। सवारी के आगे प्रतीकात्मक हाथी थे तो बैंडों की मधुर संगीतमय धुन श्रद्धालुओं को भक्तिभाव से विभोर कर रही थी। अनेक स्थान पर भक्तों ने भगवान गोदा रंगमन्नार की आरती की। मंदिर से शुरू हुई सवारी बड़े बगीचा पहुंची जहां कुछ देर विश्राम करने के बाद पुन: मंदिर प्रांगण में आई।
सायं बेला में भगवान रंगनाथ सिंह पर विराजमान हो कर निकलेंगे। ठाकुर जी की सवारी के दौरान भगवान रंगनाथ की जयजयकार गूंजती रही। ब्रह्मोत्सव में मुख्य रूप से अनघा श्रीनिवासन, माल्दा रंगाचार्य, रघुनाथ स्वामी, रंगा स्वामी, राजू स्वामी, राकेश दुबे, लखन लाल पाठक, विजय अग्रवाल, विश्वास जी, पंकज शर्मा, शास्वत स्वामी आदि मौजूद रहे। एक दिन पहले बुधवार को ब्रह्मोत्सव की व्यवस्थाओं को परखने के लिए भगवान रंगनाथ के सेनापति निकले थे। सेनापति विश्वसेन की सवारी मंदिर से चांदी की पालकी में निकली। विश्वसेन ने ब्रह्मोत्सव के लिए की गई व्यवस्थाओं को मंदिर से बड़े बगीचा तक परखा था।