बरनाहल (मैनपुरी)। थाना क्षेत्र के गांव केशोपुर में शनिवार को किशोरी ने बोरवेल में कूदकर जान दे दी। परिजनों ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन तीन घंटे के बाद भी पुलिस मौके पर पहुंची। ग्रामीणों ने शव को बाहर निकाला। पुलिस की कार्यशैली को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश देखा गया। जान देने का करण अभी पता नहीं चल पाया है।
थाना क्षेत्र गांव केशोपुर निवासी चौकीदार राजवीर सिंह कठेरिया शनिवार को बाइक सही कराने के लिए गए हुए थे। 17 वर्षीय पुत्री रीना दोपहर करीब 12 बजे खेत पर शौच के लिए जाने की बात कहकर घर से निकली थी। किशोरी ने गांव निवासी बबलू के खेत पर लगे बोरवेल में कूदकर जान दे दी। कूदने से पहले किशोरी ने दुपट्टा और चप्पले ऊपर ही उतार दी थीं। कुछ देर बाद जब ग्रामीण उधर से गुजरे तो किशोरी के बोरवेल में कूदने की जानकारी हुई।
घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। इस बीच थाना पुलिस को मौके पर आकर शव निकलवाने के लिए सूचित किया गया, लेकिन पुलिस तीन घंटा तक मौके पर नहीं पहुंची। इससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त हो गया। ग्रामीणों ने करीब 80 फीट गहरे बोरवेल में उतरकर शव को बाहर निकाला। इस बीच पुलिस भी पहुंच गई। देरी से पहुंचने पर पुलिस को ग्रामीणों का विरोध भी झेलना पड़ा।
पीड़ित पिता को पुलिस ने दी सलाह
एक ओर बेटी के चले जाने का गम, वहीं दूसरी ओर पुलिस की बेतुकी सलाह सुन राजवीर कठेरिया की आंखों से आंसू बहने लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पुलिस को सूचना दी तो कहा कि थाने आकर तहरीर दो, तब पुलिस मौके पर जाकर कार्रवाई करेगी। इतना ही नहीं पुलिस ने कहा कि अगर गांव में सामंजस्य है तो शव को निकालकर अंतिम संस्कार कर दो।
पहले भी सामने आ चुकी है लापरवाही
दो दिन पूर्व ही छेड़खानी की शिकार पीड़िता को मेडिकल के लिए आरोपियों के साथ जिला अस्पताल पुलिस लाई थी। इस दौरान लगातार आरोपी का भाई पीड़िता के साथ साथ रहकर दबाव बना रहा था। इस लापरवाही के जाहिर होने के बाद भी थाना पुलिस की कार्यशैली में जरा भी बदलाव नहीं हुआ।
पोस्टमार्टम कराने को तैयार हुए परिजन
शव को बोरवेल से निकालने के बाद परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया था। पुलिस पंचनामा की कार्रवाई कर रही थी। इस बीच कुछ लोगों के समझाने पर परिजन पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
युवक ने भी की थी खुदकुशी
गांव केशोपुर निवासी एक युवक ने भी एक दिसंबर की शाम फांसी लगाकर जान दे दी थी। संदीप शर्मा एक दिसंबर को दिल्ली से लौटा था। अगले दिन उसका शव गांव के बाहर पेड़ पर लटकता मिला था। कुछ ग्रामीण युवक की खुदकुशी को किशोरी द्वारा की गई खुदकुशी से भी जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि परिजनों की ओर से ऐसी किसी भी बात से इनकार किया गया है।