बाह। कड़ाके की सर्दी से बचाव का अलाव ही सहारा है। अलाव न जलने से ग्रामीण किसान से लेकर निराश्रित मवेशियों तक परेशान थे। जैतपुर में अलाव जलवाने की मांग समाजसेवी कुलदीप भदौरिया ने उठाई थी। उन्होंने कहा था कि संवेदनशील दुकानदार निराश्रित मवेशियों के लिए सड़क किनारे पर कूड़े कागज को जलाते हैं, जिनके आस-पास तापते हुए निराश्रित मवेशियों की तस्वीरें साझा कर खुले में रहने वाले इंसान एवं मवेशियों के लिए अलाव जलवाने की व्यवस्था किए जाने की प्रशासन से मांग की थी।
बाह, बटेश्वर, नंदगवा, जैतपुर, बासौनी, हरलालपुरा, भदरौली, कचौराघाट, फरैरा, चित्राहाट आदि के तिराहे और चौराहे पर अलाव नहीं जल रहे थे। सोमवार के अंक में अमर उजाला ने खबर प्रकाशित कर प्रशासन का ध्यान खींचा था। नतीजतन अलाव जलने लगे, जैतपुर में सड़क किनारे अलाव के आस-पास निराश्रित मवेशी देखे जा सकते हैं। कुलदीप भदौरिया ने अलाव की व्यवस्था शुरू होने पर जिम्मेदारों का आभार जताते हुए कहा है कि अलाव जलने से खुले में रहने वाले लोगों ने राहत की सांस ली है।