उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने तीर्थनगरी में आने वाले श्रद्धालुओं को अस्थि विसर्जन कराने की सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए अनुमति प्रदान की है। उनके आदेश से तीर्थ पुरोहितों ने खुशी जताई हैं। 25 मार्च से तीर्थनगरी में अस्थि विसर्जन, पिंडदान व अन्य धार्मिक अनुष्ठान पर शासन ने रोक लगा रखी थी।
लॉकडाउन के बाद अस्थि विसर्जन, पिंडदान व अन्य धार्मिक अनुष्ठान पर रोक से तीर्थ पुरोहित परेशान थे। इन कर्मकांडों से मिलने वाली दक्षिणा ही उनकी आजीविका है। इसके लिए मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री, सांसद, विधायक आदि माध्यमों से सरकार से छूट दिए जाने की मांग तीर्थ पुरोहितों ने की थी।
लॉकडाउन के दौरान कुछ श्रद्धालु निजी वाहनों से प्रशासन की अनुमति लेकर आ भी रहे थे। सोरों हरि की पैड़ी न आकर सीधे कछला घाट पर अस्थि विसर्जन कर रहे थे। अब सोरों हरि की पैड़ी पर पिंडदान एवं अस्थि विसर्जन की अनुमति से तीर्थ पुरोहित काफी खुश हैं और शासन का आभार जता रहे हैं।
यह है मान्यता
राजस्थान, मध्य प्रदेश व अन्य प्रांतों के श्रद्धालुओं का मानना है कि जब तक सोरोंजी में अस्थि विसर्जन नहीं करेंगे तब तक उनके मृत परिजन को मोक्ष की प्राप्ति नहीं होगी। तीर्थनगरी के हरिपदी कुंड में अस्थियां 72 घंटे के अंदर जल में विलगित हो जाती हैं। इसी के चलते लोग हरि की पैड़ी में अस्थि विसर्जन व अन्य अनुष्ठान करते हैं।
तीर्थपुरोहितों की व्यथा से सरोकार रखते हुए जिले के प्रभारी मंत्री अनिल शर्मा, क्षेत्रीय विधायक देवेंद्र राजपूत, भाजपा जिलाध्यक्ष केपी सिंह सोलंकी, ब्रजप्रदेश के भाजपा अध्यक्ष रजनीकांत माहेश्वरी ने प्रदेश सरकार तक तीर्थपुरोहितों की बात पहुंचाकर न्यायोचित सराहनीय समाधान निकाला है। - श्रीकांत तिवारी, भाजपा नेता।
सूकर क्षेत्र में गंगा स्नान व अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के पौराणिक महत्व को दृष्टिगोचर करते हुए सरकार की यह अनुमति स्वागत योग्य है। उम्मीद है सरकार अब शीघ्र इस धार्मिक नगरी के सर्वांगीण बहुप्रतीक्षित विकास के बजट को भी शीघ्र जारी करेगी। - राधामोहन महेरे, तीर्थपुरोहित।
वराह पुराण के अनुसार भगवान विष्णु के तीसरे अवतार भगवान वराह की इस पावन अवतरण धरा पर तीर्थनगरी में आदि काल से ही गंगा स्नान, धार्मिक कर्मकांड व तपस्या करने का फल आधे प्रहर में ही प्राप्त हो जाता है। लॉकडाउन में तीर्थनगरी में सभी धार्मिक गतिविधियां थम सी गई थीं, फिर से राहत मिली है। - पं. राहुल वशिष्ठ, ज्योतिष एवं कर्मकांड विशेषज्ञ।