लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम और देर रात तक मोबाइल चलाने की लत से शरीर थक रहा है। केवल युवा ही नहीं बच्चे और बुजुर्ग भी इसकी चपेट में हैं। मेलाटोनिन हार्मोन पर असर होने से नींद चक्र बिगड़ गया है। लिहाजा अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को बाधित करती है। यही हार्मोन नींद के चक्र को नियंत्रित करता है। इसके प्रभावित होने पर नींद अनियमित हो जाती है। व्यक्ति मानसिक रूप से असंतुलित महसूस करने लगता है।
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इस कारण डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी समस्याएं होने लगती हैं। उन्होंने बताया कि हर उम्र के अनुसार नींद की आवश्यकता अलग होती है। औसतन हर व्यक्ति को एक बार में (सिंगल स्लीप) 6 से 8 घंटे की गहरी नींद लेना जरूरी है। इसी दौरान मेलाटोनिन और एंडोर्फिन जैसे हार्मोन स्रावित होते हैं, जो सकारात्मक सोच, खुशी, ऊर्जा और शारीरिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम, खासकर सोने से पहले मोबाइल का उपयोग इन हार्मोन्स के स्राव को लगभग खत्म कर देता है।
एक घंटे पहले बंद कर दें स्क्रीन
सलाह के तौर पर उन्होंने बताया कि सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल और अन्य डिजिटल स्क्रीन का उपयोग बंद कर देना चाहिए। शांत वातावरण में नियमित समय पर सोने की आदत डालने से न केवल नींद बेहतर होगी, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक संतुलन भी बना रहेगा।