अब तक कागज में दबी तकनीकी रिपोर्ट का ‘सच’ शनिवार को एक-एक कर संसदीय कमेटी के सामने आता गया। शनिवार सुबह 9:30 से 11:30 बजे तक संसदीय समिति को ताजमहल पीला नजर आया तो चारों मीनारों के कंगूरों पर कालिख और दीवारें काली नजर आईं। मडपैक थेरेपी के अंतर को संसदीय कमेटी ने समझा। इस पर तल्ख तेवरों में सवाल दागने पर अफसरों की बोलती बंद हो गई।
संसदीय कमेटी ने दिल्ली के बंद कमरों से निकलकर आगरा का रुख किया तो ताज के पीले पड़ने के सभी कारण एक नजर में ही समझ में आ गए। यमुना में उड़ती रेत देखी तो प्रतिबंधित दायरे में डीजल-पेट्रोल के वाहन चलते मिले। यमुना में सीवर और गंदे नाले की तरह काला रंग देखा तो वहीं धूल के गुबार भी। संसदीय कमेटी ने बैराज, पौधारोपण, डीजल वाहनों पर प्रतिबंध, पेठा इकाइयों की शिफ्टिंग, कोयला, उपलों को जलाने पर रोक जैसे कदमों को उठाने के साथ ताजमहल की सफाई, मड पैक और धुलाई आदि करवाने के निर्देश दिए हैं। सबसे पहले मीनारों की कालिख की सफाई और विदेशी एक्सपर्ट को बुलाने कहा गया है।
‘ताजमहल के रखरखाव, संरक्षण से हम संतुष्ट नहीं हैं। देखरेख की जितनी जरूरत है, उतना काम नहीं हो रहा है। मीनारों पर काली परत जमी है। दीवारें गंदी हैं। एएसआई का रिपेयरिंग वर्क भी ठीक नहीं है। दिल्ली के कमरों में बैठकर नहीं, यह सच्चाई आगरा आकर ही देखी जा सकती है।’
अश्वनी कुमार, चेयरमैन, संसदीय समिति
संसदीय कमेटी की आठ साल पहले की रिपोर्ट
आगरा। आठ साल पहले 2007 में ताजमहल पर प्रदूषण की जांच के लिए राज्यसभा सांसद सीताराम येचुरी की अध्यक्षता में संसदीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दी थी। इसमें प्रदूषण के कारण ताजमहल की चमक खोने पर चिंता जताई गई। ताजमहल के पास दिन ब दिन बढ़ते जा रहे एसपीएम (सस्पेंडेड पर्टिकुलेट मैटर) को कम करने के लिए कई सिफारिशें भी की थीं। इसी रिपोर्ट में क्ले पैक यानी मड पैक थेरेपी के जरिए पीले पड़ते ताजमहल के संगमरमर की चमक लौटाने को कहा था।
अफसरों के साथ देखा ताज
संसदीय कमेटी ने प्रदेश के प्रमुख सचिव पर्यावरण, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन, टीटीजेड के चेयरमैन, एएसआई के एडीजी, भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से ताजमहल और आगरा में प्रदूषण रोकने के मुद्दे पर बात की। संसदीय कमेटी ने कमिश्नर प्रदीप भटनागर, डीएम पंकज कुमार, एडीए उपाध्यक्ष मनीषा त्रिघाटिया, सचिव कैप्टन प्रभांशु श्रीवास्तव, नगरायुक्त इंद्र विक्रम सिंह, सीपीसीबी के वैज्ञानिक देवाशीष साहा, वीके शुक्ला, एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद् एनके पाठक के साथ ताजमहल के संरक्षण और पीलेपन को देखा।
प्रधानमंत्री की अपील बेअसर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सरकारी बैठकों के आयोजनों को पंचतारा होटलों की जगह सरकारी गेस्ट हाउस या सर्किट हाउस में करने के निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार के सभी मंत्रियों को फिजूलखर्ची से बचने के निर्देशों के तहत पंचतारा होटलों में ठहरने पर भी मनाही है। ऐसे में संसदीय कमेटी के सदस्य ताजनगरी के सबसे महंगे पांच सितारा होटल में ठहराए गए। यही नहीं, उनकी उद्यमियों, अफसरों संग बैठक भी पंचतारा होटल में ही हुई। 31 सदस्यीय समिति में 12 सांसद ही आए।
इन कदमों की जरूरत
एक अगस्त से नहीं चलेंगे 29,439 डीजल वाहन
पेठा उद्योग में कोयले का प्रयोग तत्काल बंद होगा
यमुना में नालों की टेपिंग, सीवेज प्लांट की क्षमता बढ़े
कॉरीडोर पर चार मुगल कालीन बागों का संरक्षण
ढाई लाख पौधे ताजमहल के आस-पास लगाएंगे
यमुना की धूल उड़ने से रोकने के लिए पानी की उपलब्धता