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भगवा रंग में रंगी ताजनगरी

Sun, 12 Mar 2017 01:04 AM IST
भगवा रंग में रंगी ताजनगरी
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भगवा रंग में रंगी ताजनगरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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ताजनगरी में भाजपा की लहर या आंधी नहीं, सुनामी चली है। राम लहर में भी सात सीटें ही मिल पाई थीं जबकि इस बार नौ की नौ सीटों पर कमल खिला है। आजादी के बाद यह सिर्फ दूसरा क्लीन स्वीप है। 1951 में कांग्रेस ने किया था। तब जिले में सात सीटें थी। 1962 में नौ सीटें बन जाने के बाद पहली बार किसी ने पूरी तरह सफाया किया है। बसपा, सपा, कांग्रेस, रालोद का खाता तक नहीं खुला है। भाजपा ने छह सीटें बसपा से छीनी हैं और एक सपा से।
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बसपा से एत्मादपुर, छावनी, ग्रामीण, खेरागढ़, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी छीनी है। सपा से बाह। बाह में सपा को जिताने वाले राजा अरिदमन सिंह इस बार भाजपा में आ गए। उनकी पत्नी रानी पक्षालिका सिंह ने कमल खिला दिया। इससे पहले भाजपा 2002 में जीती थी। तब राजा उम्मीदवार थे।
एत्मादपुर में भाजपा पहली बार जीती है। राम प्रताप चौहान यहां के पहले भाजपा विधायक हैं। ग्रामीण सीट पर 26 साल बाद जीत मिली है। छावनी, फतेहपुर सीकरी में 21, फतेहाबाद, खेरागढ़ में 15 साल का इंतजार रहा। उत्तर में 1985 से लगातार 10 वीं बार जीत मिली  है। जगन प्रसाद गर्ग पांचवीं बार विधायक बने हैं। उनसे पहले सत्य प्रकाश विकल विधायक थे। दक्षिण में योगेंद्र उपाध्याय लगातार दूसरी बार जीते हैं।
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ढह गया मायावती का किला  
आगरा को बसपा दलितों की राजधानी कहती है। दो बार से बसपा के छह छह उम्मीदवार जीत भी रहे थे। इनमें से तीन जीत की हैट्रिक लगाने उतरे थे लेकिन मिली करारी हार। छावनी से गुुटियारी लाल दुबेश, फतेहपुर सीकरी से सूरजपाल, खेरागढ़ से भगवान सिंह कुशवाहा। एत्मादपुर से धर्मपाल 2007 में जनमोर्चा के टिकट पर जीते,  2012 में बसपा के। इस बार हार गए।
नहीं बोला अखिलेश का काम
आगरा को अखिलेश यादव ने ताजगंज प्रोजेक्ट दिया। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे बनवाया। पहला एनआरआई सम्मेलन भी यहीं किया। वह खुद यहां लगातार आते भी रहे। लेकिन उनका काम नहीं बोला। सपा का खाता नहीं खुला।
कांग्रेस-रालोद का भी नहीं खुला खाता 
सपा से गठबंधन के बावजूद कांग्रेस भी जीरो ही रही। 2012 में सपा ने बाह सीट जीती थी। कांग्रेस 24 साल से खाता नहीं खोल पाई है। रालोद का भी खाता नहीं खुल पाया। अजित सिंह, जयंत चौधरी और चारू चौधरी वोट मांगने आए लेकिन बात नहीं बन पाई ।

तो मुस्लिम महिलाओं के भी वोट मिले 
आगरा। भाजपा को इस बार मुस्लिम बहुल इलाकों में भी वोट मिले हैं। चाहे वह छावनी हो या दक्षिण विधान सभा क्षेत्र। इसकी वजह मानी जा रही है तीन तलाक का मुद्दा। राजनीति के जानकारों की मानें तो मुस्लिम महिलाओं ने कमल वाला बटन दबाया है। दूसरा मुस्लिम वोट बसपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन में बंटे भी हैं। एक बार फिर कोई मुस्लिम उम्मीदवार नहीं जीत पाया है। आगरा में 2002 में चौधरी बशीर और 2007 में जुल्फिकार भुट्टो छावनी से जीते थे। इससे पहले और बाद में कोई मुस्लिम विधायक नहीं बन पाया।
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