टिकट वितरण के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी में विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी छोड़कर अन्य दलों के साथ जुड़ने का सिलसिला शुरू हो गया है। गुरुवार को केशव दीक्षित ने कांग्रेस पार्टी का हाथ थाम लिया। कई और नेता दूसरे दलों में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
केशव दीक्षित 2007 में खेरागढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। इस बार भी यहीं से टिकट के दावेदार माने जा रहे थे लेकिन पार्टी ने महेश गोयल को टिकट दिया है। टिकट न मिलने पर केशव दीक्षित की ओर से कोई सीधी प्रतिक्रिया तो नहीं आई लेकिन गुरुवार को उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया। बताया जा रहा है कि सपा और कांग्रेस के गठबंधन के तहत उनकी पत्नी लता दीक्षित को खेरागढ़ से प्रत्याशी बनाया जा सकता है।
यहीं नहीं भाजपा में और भी दावेदार बागी तेवर अपनाए हुए हैं। फतेहपुर सीकरी सीट पर नाराज राजकुमार चाहर पार्टी से पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। उनके समर्थन में अछनेरा, फतेहपुर सीकरी के कई मंडल अध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफे जिलाध्यक्ष श्याम भदौरिया को भेजे हैं। पूर्व मेयर बेबीरानी मौर्य के नाम से नामांकन पत्र लिया गया है। बेबीरानी कैंट से दावेदारी कर रही थीं। पूर्व मेयर अंजुला सिंह माहौर भी नाराज हैं लेकिन अभी तक खुलकर कुछ नहीं बोल रही हैं। ग्रामीण से दावेदारी कर रहे पार्षद राजेश कठेरिया ने नामांकन पत्र लिया है। खेरागढ़ से दावेदारी रहे अमर सिंह परमार ने भी नामांकन पत्र खरीदा। सूत्र बताते हैं कि वह सपा के संपर्क में हैं।
22 को होगी किसान सेना की बैठक
फतेहपुर सीकरी पर चौधरी उदयभान सिंह की टिकट का विरोध कर रहे राजकुमार ने किसी और दल से न लड़ने का एलान तो किया है लेकिन उनका आक्रोश शांत नहीं हुआ है। 22 जनवरी को कागारौल में किसान सेना की महापंचायत बुलाई है। इसी पंचायत में राजकुमार चाहर आगे की रणनीति का एलान करेंगे।