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‘अपनों’ का ही विरोध तो कैसे बोलेंगे हल्ला

Mon, 20 Apr 2015 01:31 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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मोदी और शाह के संगठनात्मक नेतृत्व की शक्ति ने भाजपा को भले ही दुनिया की सबसे बड़ी राजनीति पार्टी के तौर पर स्थापित कर दिया हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर संगठन में आपसी सामंजस्य का अभाव अभी भी झलक रहा है। मंगलवार को जिस ज्वलंत मुद्दे को लेकर पार्टी कलेक्ट्रेट पर जिलास्तरीय प्रदर्शन करने जा रही है, उस पर मंथन के लिए पदाधिकारियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक महज 24 घंटे पहले बुलाई गई है। इस पर पार्टी के कुछ नेताओं ने नाराजगी भी जाहिर की है।
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बता दें कि भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक राना ने 15 अप्रैल को बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा न मिलने पर 21 अप्रैल को कलेक्ट्रेट घेरने की घोषणा की थी। ताकि किसानों के मुद्दे पर प्रदेश सरकार को घेरा जा सके। सूत्रों की मानें तो इस प्रदर्शन के बारे में अन्य पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से न कोई चर्चा की और न ही सूचित किया। इस कार्यक्रम की विधिवत जानकारी रविवार को फोन और एसएमएस के जरिए दी गई। सोमवार को ब्रजक्षेत्र कार्यालय में बैठक के लिए बुलाया गया है। इससे पार्टी के कुछ नेता खिन्न हैं। चूंकि प्रदर्शन पार्टी का है, इसलिए हो सकता है कि वह शामिल तो रहें, लेकिन अपेक्षित भीड़ को जुटाने में सहयोग करने से कतराएं।

भाजपाइयों ने किया दौरा
जिलाध्यक्ष अशोक राना के अनुसार, 21 अप्रैल को किसान पूर्वाह्न 11 बजे सुभाष पार्क पर एकत्रित होंगे। यहां से जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट पर पहुंचेंगे। प्रदर्शन में अधिक से अधिक भीड़ जुटाने के लिए जिलाध्यक्ष ने पथौली, मिढ़ाकुर, बरौदा, डाबली, नगला मंशा, अभैदोपुरा, किरावली, अभुअपुरा आदि क्षेत्रों में जनसंपर्क किया। उनके साथ ग्याप्रसाद शर्मा, चंदर शर्मा, अनेक सिंह वर्मा आदि मौजूद थे। केके भारद्वाज, डा. संतोष चाहर, मुन्नालाल शर्मा आदि ने भी विभिन्न क्षेत्रों में जनसंपर्क किया।
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महापंचायत स्थगित
किसानों की समस्या को लेकर ही 23 अप्रैल को भाजपा नेता राजकुमार चाहर के नेतृत्व में किरावली में होने वाली महापंचायत स्थगित कर दी गई है। राजकुमार चाहर के अनुसार, 21 अप्रैल को पार्टी का कलेक्ट्रेट में बड़ा प्रदर्शन प्रस्तावित है। यदि इस प्रदर्शन के बाद 10 दिन तक किसानों को लाभ नहीं मिलता है तो महापंचायत होगी।
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