भाजपा के सांसद, मंत्री और विधायक अब मुस्लिम गढ़ कहे जाने वाले इलाकों में बिखरे हिंदू समाज को एकजुट करने का जिम्मा संभालेंगे। साथ ही उन्हें प्रदेश के उन बूथ और इलाकों की जिम्मेदारी इन्हें सौंपी जाएगी, जहां भाजपा कभी जीती नहीं या फिर वोट बहुत कम मिला है। ऐसे इलाकों में माननीयों का प्रवास संगठन के पदाधिकारियों के साथ होगा। हर महीने संगठन के पदाधिकारी इन बूथों की समीक्षा भी करेंगे।
लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा की नजर 2022 विधानसभा चुनाव पर है। सबसे पहला जोर संगठन की मजबूती पर है। अबकी बार सांसद, मंत्री और विधायकों पर भी संगठन के काम की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। चाहे सदस्यता अभियान हो या संगठन का कोई दूसरा कार्य। सभी में माननीयों की भागेदारी सुनिश्चित की जा रही है।
इसके लिए बनाई जा रही रणनीति में प्राथमिकता संगठन की मजबूती बढ़ाना है। शुक्रवार को मथुरा के सौंख में हुए ब्रज क्षेत्र के प्रशिक्षण वर्ग में पहुंचे सभी मंत्री और विधायकों से प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल ने कहा कि प्रदेश में कुछ ऐसे बूथों का चिन्हीकरण किया गया है जहां भाजपा कभी नहीं जीती।
मंत्री और विधायकों को दिया ये मंत्र
प्रशिक्षण वर्ग में भाजपा के पदाधिकारियों से सुनील बंसल ने कहा कि संगठन के काम में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लें। क्योंकि जब कार्यकर्ता और संगठन मजबूत होगा तभी पार्टी मजबूत होती है। यहां उन इलाकों का भी जिक्र किया गया जहां लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों का प्रदर्शन कमजोर रहा।
उन इलाकों पर खास जोर देने का फैसला किया गया है। यहां समय समय पर कार्यक्रम कराए जाएंगे। संगठन और सरकार मिलकर काम करेंगे। लोगों की समस्याओं का समाधान कराया जाएगा। प्रदेश में कुछ ऐसे बूथों का चिन्हीकरण किया गया है जहां भाजपा कभी नहीं जीती।
ऐसे बूथ मथुरा, मैनपुरी, हाथरस, अलीगढ़, बरेली, मुरादाबाद, रामपुर, संभल, अमरोहा, मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर, गाजियाबाद, आजमगढ़, गोरखपुर और कानपुर समेत कई जिलों में हैं। इन बूथों की जिम्मेदारी सांसद, मंत्री और विधायकों को सौंपी जा रही है। बंसल ने कहा कि जब कार्यकर्ता और संगठन मजबूत होगा तभी पार्टी मजबूत होती है।