भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, साथ में कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना
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भाजपा में नए प्रदेश अध्यक्ष सांसद पंकज चौधरी के कमान संभालने के बाद संगठन में बदलाव की कवायद अंतिम दौर में पहुंच गई है। जिले से प्रदेश स्तर तक पदाधिकारी बनने की चाहत में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में डेरा डाल दिया है। वीवीआईपी गेस्ट हाउसों से लेकर मंत्रियों के आवासों तक पैरवी का दरबार सजा हुआ है। कई तो दिल्ली के भी चक्कर काट रहे हैं ताकि केंद्रीय नेतृत्व का विश्वास हासिल कर सकें।
लखनऊ में पिछले कई दिनों से महानगर, जिलाध्यक्ष और क्षेत्रीय अध्यक्ष डेरा डाले हुए हैं। संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह के साथ चर्चा के बाद नवरात्र में पदाधिकारियों की नई सूची जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि नए युग की भाजपा में अब बायोडाटा और सामाजिक ताना-बाना नियुक्ति का आधार बनने की वजह से मेहनत व समीकरण के लिए लोगों को ज्यादा जतन करने पड़ रहे हैं।
महानगर में स्थिति साफ, जिले में माथापच्ची
सांगठनिक फेरबदल की सुगबुगाहट के बीच आगामी चुनावों को दिमाग में रखकर माथापच्ची की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि महानगर की नई टीम के लिए नाम लगभग तय हो चुके हैं। वहीं, जिला कार्यकारिणी के लिए मंथन जारी है। पुराने निष्ठावान कार्यकर्ताओं के साथ-साथ नए चेहरे भी अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए जोर लगा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि हाईकमान किसे संगठन में काम करने का मौका देता है।
महिला आरक्षण ने फंसाया पेंच
पार्टी की ओर से 80 सदस्यीय कार्यकारिणी में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने का फैसला लिया है। यही वजह है कि महामंत्री व कार्यकारिणी सदस्य जैसे पदों के लिए महिला नेताओं की तलाश की जा रही है। महानगर में तो कई सक्रिय महिला कार्यकर्ता होने की वजह से दिक्कत नहीं हुई। हालांकि जिला कार्यकारिणी के लिए महिलाओं की उपलब्धता उतनी नहीं है।