संगठनात्मक चुनाव में पार्टी के अंदर मचे घमासान के चलते भाजपा ने जिलाध्यक्ष और जिले के मंडल अध्यक्ष के चुनाव स्थगित कर दिए हैं। विवादों के बीच शुक्रवार को जारी की गई मंडल अध्यक्षों की सूची के बाद प्रदेश नेतृत्व ने यह निर्णय लिया। अब यह चुनाव प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के बाद होंगे।
बता दें कि पिछले दिनों जिला चुनाव अधिकारी मनोज मिश्रा और जिला सह चुनाव अधिकारी राजेश चौधरी ने जिले के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर जिलाध्यक्ष के चुनाव के लिए 18 जनवरी को नामांकन की तिथि घोषित की थी। मगर, इससे पहले मंडल अध्यक्षों की सूची जारी करने के निर्देश दिए थे। गुटबाजी के चलते स्थानीय स्तर पर मंडलों के चुनाव होने के बाद भी इस सूची को रोके रखा गया। एक खेमा विरोधी खेमे के दावेदारों को शिकस्त देने के लिए अपने लोगों को फिट करना में लगा है।
यही वजह रही कि शुक्रवार देर शाम को जब मंडल अध्यक्षों की सूची जारी की गई तो इस पर कुछ नेताओं ने आपत्ति दर्ज करा दी। 22 में से 14 मंडल अध्यक्षों की सूची में कई सक्रिय सदस्य नहीं थे तो कुछ ने नामांकन तक नहीं किया था। शिकायत के बाद प्रदेश नेतृत्व ने सूची को स्थगित कर दिया। मंडल अध्यक्षों के बिना जिलाध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सकता था इसलिए संगठन ने जिलाध्यक्ष का चुनाव भी स्थगित कर दिया है।
इनसेट
सदस्यता अभियान में रहे निष्क्रिय
पार्टी के अंदर की ‘राजनीति’ के तहत एक खेमे ने एक मंडल पर तो ऐसे कार्यकर्ता को अध्यक्ष बना दिया, जिसने सदस्यता अभियान में कोई भूमिका नहीं निभाई। जबकि आला कमान के साफ निर्देश थे कि ऐसे सदस्यों को अहम जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
आठ मंडलों पर चुनाव ही नहीं
मंडल अध्यक्षों के चुनाव में सबसे बड़ा विवाद आठ मंडलों पर चुनाव न होना रहा। जिले में सदस्यता अभियान सफल होने का दावा किया गया था। मगर, 22 में से आठ मंडलों पर चुनाव न कराने का कारण 50 फीसदी से कम सदस्यता बताई गई। ऐसे में कुछ नेताओं ने सवाल उठाया कि जानबूझ कर सदस्यता सूची गायब की गई हैं। ताकि विरोधी खेमे के दावेदार जिलाध्यक्ष के लिए आवेदन न कर पाएं।
चुनाव निरस्त नहीं हुआ है, स्थगित किया गया है। प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के बाद जिलाध्यक्ष का चुनाव होगा। इससे पहले मंडल अध्यक्षों की सूची फिर से जारी की जाएगी। जिन मंडलों पर चुनाव रह गए हैं, उन पर भी विचार किया जाएगा।
- मनोज मिश्रा, जिला चुनाव अधिकारी