भाजपा में नई प्रदेश और क्षेत्रीय नियुक्तियों के बाद संगठन में जगह पाने की उम्मीद लगाए नेता फिर सक्रिय हो गए हैं। ब्रज क्षेत्र में लोधी फैक्टर और राजू भैया की बढ़ती राजनीतिक पकड़ के बीच दिल्ली-लखनऊ की सियासी राह अब अलीगढ़ होकर गुजरती दिख रही है।
भाजपाइयों के लिए दिल्ली और लखनऊ का सफर अब अलीगढ़ के जरिये पूरा हो रहा है। प्रदेश पदाधिकारियों और क्षेत्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के साथ ही भाजपा की जिला और महानगर टीम में जगह पाने में नाकाम नेताओं ने नए सिरे से दिल्ली-लखनऊ और क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरन सिंह लोधी के जिले बरेली की परिक्रमा शुरू की है। सियासत के खिलाड़ी अलीगढ़ के रास्ते लखनऊ का सफर तय करने की जुगत में हैं।
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दरअसल, नए क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरन सिंह लोधी पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे पूर्व सांसद राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया के करीबी माने जाते हैं। समाजवादी पार्टी के पीडीए फाॅर्मूले के बाद से ही भाजपा के लिए अपने पक्के वोटबैंक पर पकड़ मजबूत करने का दबाव बढ़ गया था। केंद्रीय नेतृत्व लगातार ब्रज क्षेत्र खासकर लोध बाहुल्य क्षेत्रों के लिए बीएल वर्मा को आगे बढ़ा रहा था।
नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें दो मंत्रालयों का राज्यमंत्री बनाया गया। नए प्रदेश अध्यक्ष की दाैड़ में भी उनका नाम आगे था। हालांकि, राजू भैया ने अखिल भारतीय लोधी कल्याण महासभा बनाकर साक्षी महाराज जैसे बड़े नामों को अपने साथ मिलाकर लोध वोटबैंक पर अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू की। उसका असर भाजपा की सियासत पर दिखना शुरू हो गया। चूंकि लोधी वोट भाजपा के साथ परंपरागत रूप से जुड़ा रहा है।
साथ ही उनकी आस्था कल्याण सिंह परिवार से जुड़ी रही है। ऐसे में पकड़ का ही नतीजा रहा कि प्रदेश अध्यक्ष बनने की दौड़ में सबसे आगे रहे बीएल वर्मा का नाम रेस से बाहर हो गया। यही नहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद जब पंकज चौधरी आगरा पहुंचे तो स्वागत कार्यक्रम में सांसद-विधायक न होने के बावजूद राजू भैया को मंच पर बैठाया गया था।
केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा के करीबी एटा सदर से विधायक विपिन वर्मा डेविड ने आपत्ति जताई लेकिन उनकी सुनी नहीं गई। अब राजू भैया के संगठन में महामंत्री रहे पूरन सिंह को क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाए जाने को ब्रज क्षेत्र में उनकी मजबूत होती पकड़ के रूप में देखा जा रहा है।