बंद कर दिया था मासिक भुगतान
पुलिस के मुताबिक, लोगों को बाइक टैक्सी में पैसा लगाकर 10 हजार रुपये प्रतिमाह दो वर्ष तक देने का झांसा दिया गया। लाखों लोगों ने निवेश कर दिया। शुरू में लोगों को रिटर्न भी मिला, लेकिन करोड़ों में जमा हुई रकम को प्रापर्टी सहित अन्य दूसरे कामों में लगा दिया। घाटा होने पर लोगों को मासिक भुगतान बंद कर दिया गया। दो साल पहले यह घोटाला सामने आया।
जल्द आएगी पुलिस टीम
एसपी ईओडब्ल्यू सेक्टर मेरठ के एसपी राम सुरेश ने बताया कि आगरा में लोगों ने कंपनी में अपना पैसा लगाया था। टैक्सी के रूप में चलाने के लिए 200 बाइकें खरीदी थीं। सभी बाइकें चिह्नित कर ली हैं। उन्हें बरामद करने के लिए जल्द ही टीम भेजी जाएगी। इस संबंध में एसएसपी बबलू कुमार से संपर्क किया है। इसमें शामिल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट में की थी कार्रवाई
पुलिस ने बताया कि बाइक बोट घोटाले के आरोपियों ने लोगों को ओला और उबर की तरह बाइक टैक्सी चलवाने का झांसा दिया था। 23 महीने पहले यह मामला सामने आया था। जयपुर निवासी सुनील मीणा ने नोएडा के दादरी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। अब तक 60 मुकदमे दर्ज हुए हैं।
पुलिस सरगना संजय भाटी, राजेश भारद्वाज, हरीश कुमार, विजयपाल कसाना, संजय गोयल, विनोद कुमार, राजेश सिंह यादव, विशाल कुमार, पुष्पेंद्र सिंह, विनोद कुमार, आदेश भाटी, सचिन भाटी, करण पाल, सुनील कुमार, पवन भाटी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई कर चुकी है।