भीमनगरी सब स्टेशन पर आग की लपटों में घिरी चार जिंदगियां मदद को 20 मिनट तक छटपटाती रहीं। बीहड़ में बने सब स्टेशन में जान बचाने को कोई इधर भाग रहा था तो कोई उधर। इस बीच चुनिंदा कर्मचारी उनकी जान बचाने के लिए प्रयास करते रहे। आसपास के लोग जब मदद को आए, तब तक चारों बुरी तरह से जल चुके थे। कपड़े उतारते वक्त उनकी खाल तक खिंच रही थी। ऐसे में मदद को आगे बढ़े हाथ भी कांप उठे। आग में झुलसे चारों व्यक्तियों की यह हालत विद्युत विभाग की लापरवाही की वजह से हुई।
शुक्रवार पूर्वाह्न लगभग 10.55 बजे यह हादसा हुआ। जूनियर इंजीनियर किशन सिंह यादव, लाइनमैन हरिप्रसाद और ठेकेदार के दो कर्मचारी ट्रांसफार्मर फट जाने के बाद बुरी तरह से झुलस गए थे। सब स्टेशन पर अग्नि से सुरक्षा का कोई उपकरण नहीं था। न ही कर्मचारियों ने सेफ्टी ड्रेस और हेलमेट पहन रखा था। ट्रांसफार्मर फटने के बाद एसएसओ एसके कुनाल और चौकीदार मदद को आगे तो बढ़े लेकिन उनके हाथ में कुछ नहीं था।
अंदर से जैसे-तैसे अग्निशमन यंत्र बाहर निकाले लेकिन जंग लगे होने के कारण चल नहीं सके। रेत डालने के लिए बाल्टी उठाईं तो वह टूटी हुई थी। इतना ही नहीं, आग पर काबू पाने के लिए मौके पर एक कंबल तक नहीं था। दोनों कर्मचारी आग से तड़प रहे जेई और लाइनमैन पर जैसे-तैसे थोड़ी बहुत रेत ही डाल सके।
सब स्टेशन के पास स्थित मंदिर के पुजारी फक्कड़ बाबा कुछ मजदूरों के साथ मंदिर में रखे कंबल और रजाई लेकर आग बुझाने पहुंचे, तब आग पर काबू पाया जा सका। मगर, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। फक्कड़ बाबा का कहना है कि अग्निशमन यंत्राें में जंग लगी हुई थी। मजदूरों ने जैसे-तैसे एक को चलाया, इसी से ट्रांसफार्मर की आग बुझाई गई। सब स्टेशन पर घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए भी कोई वाहन नहीं था। अगर, सीआईएसएफ के जवान न आते तो न जाने कितनी देर और तड़पना पड़ जाता। बता दें कि विद्युत विभाग के अधिकांश सब स्टेशनों की कमोवेश ऐसी ही स्थिति है। यहां सुरक्षा के कोई बंदोबस्त नहीं है।
इनसेट
बड़ी तबाही टली
सब स्टेशन में 250 केवीए ट्रांसफार्मर की आग न बुझाते तो पास में ही 20 एमवीए का बड़ा ट्रांसफार्मर रखा हुआ था। इसमें भी आग लग सकती थी। इससे बड़ा धमाका होता और काफी तबाही होती।
ट्रांसफार्मर में थी तकनीकी खामियां
आगरा। भीमनगरी सब स्टेशन का ट्रांसफार्मर यूं ही नहीं फटा। इसके रखरखाव में हद दर्ज की लापरवाही बरती जा रही थी। तकनीकी रूप से इसमें तमाम खामियां थीं।
सूत्रों की मानें तो 250 केवीए का ट्रांसफार्मर काफी कमजोर था। इसमें न तो प्रोडक्शन रिले थी और न ही प्रोडक्शन ब्रेकर, जिससे कि ट्रांसफार्मर को फटने से रोका जा सके। जानकारों के अनुसार, प्रोडक्शन रिले और ब्रेकर ट्रांसफार्मर में अंदरूनी फॉल्ट होने से रोकते हैं। जैसे ही किसी ट्रांसफार्मर में करंट छोड़ा जाता है, उसमें चिंगारी निकती हैं। इससे हादसे की संभावना अधिक रहती है। प्रोडक्शन रिले और ब्रेकर करंट को डिसकनेक्ट कर देता है। इस ट्रांसफार्मर के फटने का मुख्य कारण यही खामी बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मर सब स्टेशन बनने के दौरान ही लगाया गया था। ताजगंज के बीहड़ वाले क्षेत्र में वर्ष 2009 में सब स्टेशन का निर्माण हुआ था। इसके अलावा इस ट्रांसफार्मर का मेंटेनेंस भी ठीक तरीके से नहीं था। गौरतलब है कि यही हालत अन्य सबस्टेशनों की है। सब स्टेशनों पर पर्याप्त उपकरण तक नहीं हैं। स्टोर से तो उपकरण जारी किए जाते हैं लेकिन ये बीच में ही गायब कर दिए जाते हैं। इसकी वजह से सब स्टेशनों का रखरखाव ठीक से नहीं हो पा रहा।
अनट्रेंड हाथों में सब स्टेशन
यूपीपीटीसीएल ने अधिकांश सब स्टेशनों के मेंटेनेंस का कार्य ठेके पर दे रखा है। इनमें से कई ठेकेदारों के साथ-साथ इनके कर्मचारी अनुभवहीन हैं। ट्रांसफार्मर की मरम्मत तो दूर उन्हें इनके बारे में सही से जानकारी तक नहीं है। ये ठेकेदार भी नियमित देखरेख की बजाय, कभी-कभी ही पहुंचते हैं। इसकी वजह से छोटे-छोटे फॉल्ट बड़े हो जाते हैं।
बड़े ट्रांसफार्मरों के रखरखाव में भी लापरवाही
अधिकांश सब स्टेशनों पर उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मर बिना सुरक्षा के कार्य कर रहे हैं। ट्रांसफार्मरों को बिना फ्यूज वायर सिस्टम और करंट ट्रांसफार्मर (सीटी) उपकरणों के बिना ही बिजली सप्लाई दी जा रही है। फ्यूज वायर सिस्टम नहीं होने के चलते ट्रांसफार्मरों पर हाइटेंशन विद्युत तारों से सीधे जोड़कर आपूर्ति ओसीबी मशीनों तक पहुंचाई जा रही है। विद्युत सुरक्षा निदेशालय की गाइड लाइन के अनुसार करंट ट्रांसफार्मर यानी सीटी या एमसीवी या फिर फ्यूज वायर सिस्टम लगाया जाता है। ताकि हाइटेंशन लाइनों या फिर ओसीबी या बीसीबी मशीनों में फाल्ट आने पर सीधा ट्रांसफार्मर पर जर्क न आए और उक्त सीटी या फ्यूज वायर सिस्टम से विद्युत सप्लाई आगे जाने से रुक जाए।
विद्युत सुरक्षा निदेशालय के ये हैं निर्देश
. ट्रांसफार्मर को चार्ज करते समय पास नहीं खड़ा होना चाहिए।
. मेंटेनेंस वर्क के दौरान सिर पर हेलमेट और फायर व करंट प्रूफ दस्ताने।
. कार्यस्थल पर फायर इंस्टीग्यूशन उपकरण होने चाहिए।
. पास में रेत से भरी हुई बाल्टियां रखी होनी चाहिए।
. सब स्टेशन पर प्राथमिक उपचार का बंदोबस्त हो।
जानलेवा हो सकते हैं खंभों पर रखे ट्रांसफार्मर
आगरा। सब स्टेशन में तीन विद्युतकर्मियों की मौत ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे ज्यादा डर ग्रामीण क्षेत्र के उन लोगों को होने लगा है, जिनके घर के बाहर लगे बिजली के खंभों पर ट्रांसफार्मर रखे हुए हैं। राहगीर भी कम परेशान नहीं हैं।
बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश स्थानों पर ट्रांसफार्मर खंभों पर ही कस दिए गए हैं। ऐसे में आंधी के दिनों में तो गिरने का डर बना ही रहता है, साथ ही स्पार्किंग से इनके फटने का भी डर बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में खंभों की हालत भी ऐसी नहीं है कि इनका वजन सहन कर सकें। तमाम जगहों पर ट्रांसफार्मर खुले में भी रखे हुए हैं। इनके आसपास तमाम ढेल-ठकेल वाले खड़े होते ही हैं। कुछ पार्कों और सार्वजनिक स्थनों पर भी बिना सुरक्षा व्यवस्था के ट्रांसफार्मर रख दिए हैं। इनके आसपास तमाम बच्चे खेलते रहते हैं।
पहली बार हुआ ऐसा हादसा
विभागीय अधिकारियों की मानें तो जिले में इस तरह का पहला हादसा हुआ है। इससे पहले इस तरह से ट्रांसफार्मर फटने की घटना सामने नहीं आई। ट्रांसफार्मरों में आग लगने की घटनाएं आम हैं। मगर, इस घटना ने विभागीय अधिकारियों की नींद उड़ा दी है।
तीन फीडरों की बत्ती गुल
आगरा। भीमनगरी सब स्टेशन का ट्रांसफार्मर फटने की वजह से तीन फीडरों की बिजली कुछ देर के लिए गुल हो गई। इससे जुड़े जालमा, शहीद नगर और बमरौली कटारा फीडर से जुड़े क्षेत्रों में बिजली कटौती करनी पड़ी। हालांकि हादसे के कुछ देर बाद लाइन चालू कर दी गई। हालांकि शहर के अन्य फीडरों पर इसका असर नहीं पड़ा। यहां बिजली आपूर्ति सुचारु रही।