मौजा घटवासन में 2596 करोड़ रुपये की भूमि खुर्दबुर्द हो गई। इसका रिकाॅर्ड भी गायब है। रजिस्ट्री दफ्तर में जहां एक तरफ रोक के बावजूद खरीद-फरोख्त का खेल चल रहा है। वहीं दूसरी ओर मौजा घटवासन का सजरा, बंदोबस्त से लेकर नॉन जेड ए की खतौनियां तक गायब हैं।
आगरा में जमीनों पर कब्जा कर फर्जी बैनामा से खरीद-फरोख्त के खेल में मौजा घटवासन में 2596 करोड़ रुपये की भूमि खुर्दबुर्द हो गई। मौजा घटवासन का रिकाॅर्ड भी गायब है। रजिस्ट्री दफ्तर में जहां एक तरफ रोक के बावजूद खरीद-फरोख्त का खेल चल रहा है। वहीं दूसरी ओर मौजा घटवासन का सजरा, बंदोबस्त से लेकर नॉन जेड ए की खतौनियां तक गायब हैं।
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जीवनी मंडी स्थित जोंस मिल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जिसमें सत्ताधारी नेताओं व उनके रिश्तेदारों तक नहीं अवैध ढंग से जमीनों की खरीद-फरोख्त कर अकूत संपत्तियां अर्जित कर ली। 2021 में जांच में एसआईटी गठित होने के बाद भी एक माननीय ने जांच एसआईटी की जगह आर्थिक अपराध शाखा को स्थानांतरित करा दी। जहां यह जांच पिछले पांच साल से घोंघा की तरह रेंग रही है। जमीनों की खरीद-फरोख्त में कई सत्तादल के नेता व कार्यकर्ता शामिल हैं।
जांच रिपोर्ट में ढाई हजार करोड़ रुपये की सरकारी संपत्तियां खुर्दबुर्द होने के बाद जटिलताएं बढ़ने से रोकने के लिए तत्कालीन डीएम प्रभु एन सिंह ने मौजा घटवासन के गाटा संख्या 1734, 1737, 1739, 1741, 2078, 2079, 2080, 2081, 2085 व 2087 में भूमि अंतरण पर रोक लगाई थी। लेकिन, डीएम के हटने के बाद फिर यहां बैनामा शुरू हो गए। पांचों सब रजिस्ट्रार दफ्तरों में फर्जी बैनामा गाटा संख्या में हेराफेरी कर पंजीकृत कराए जा रहे हैं। जिनके बदले में सब रजिस्ट्रार से लेकर उच्च अधिकारियों की जेब गर्म हो रही है।
घटवासन में नजूल घोटाले पर पर्दा
सदर तहसील मौजा घटवासन में नजूल भूमि का घोटाला हुआ। जांच के लिए तहसील रिकॉर्ड रूम व जिला निबंधक अभिलेखागार में रखरखाव में लापरवाही से बेशकीमती दस्तावेज नष्ट हो गए। दिलचस्प बात यह है कि घटवासन का नक्शा, बंदोबस्ती सजरा तक गायब है। भूमाफिया व्यक्तियों ने सिर्फ तहसील रिकॉर्ड रूम नहीं, बल्कि जिला अभिलेखागार से लेकर राजस्व परिषद व राजकीय प्रिटिंग प्रेस तक से नक्शा गायब कराया दिया। जिस वजह से 4 साल से घटवासन के घोटाले पर पर्दा पड़ा हुआ है।