आगरा में टीटीजेड (ताज ट्रिपेजियम जोन) के उद्यमियों को बड़ी राहत मिली है। ढाई साल से चल रही बदलाव की मांग के बाद आखिर उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उद्योगों की कैटेगरी में बदलाव कर टीटीजेड के उद्योगों को राहत दी है।
अब व्हाइट कैटेगरी में 36 की जगह 156 उद्योग होंगे, जबकि ग्रीन कैटेगरी में 63 की जगह 28 उद्योग शामिल किए गए हैं। इससे आगरा के जूता, पेठा, डीजल इंजन, लेदर गुड्स, क्लीनिक, रेस्टोरेंट, होटल, प्रिंटिंग प्रेस समेत कई उद्योगों को फायदा हो गया है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव आशीष तिवारी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव को कैटेगरी में बदलाव की जानकारी दी है। 15 और 30 नवंबर को हुई बैठक के बाद ग्रीन और व्हाइट कैटेगरी में बदलाव किया गया।
आसानी से मिलेगी अनुमति
इसका असर सबसे ज्यादा ताज ट्रिपेजियम जोन के 10,400 वर्ग किमी में फैले क्षेत्र में पड़ेगा। आगरा का जूता, पेठा, डीजल इंजन निर्माण, रेस्टोरेंट, होटल, क्लीनिक, लैब, मसाला यूनिट, अचार, जनरेटर, आईटी उद्योग को आसानी से अनुमति मिल सकेगी।
पहले व्हाइट कैटेगरी में 36 किस्म के उद्योग थे, लेकिन अब जो 156 किस्म के उद्योग व्हाइट कैटेगरी में शामिल किए गए हैं, वह गैस आधारित हैं। इसी तरह ग्रीन कैटेगरी में भी कई उद्योग ऑरेंज श्रेणी में शामिल किए हैं, लेकिन इनमें गैस ईंधन के रूप में प्रयोग करना होगा।
यह थी परेशानी की वजह
अप्रैल 2016 में पर्यावरण मंत्रालय ने उद्योगों की कैटेगरी में बदलाव किया और तीन की जगह चार कैटेगरी बना दीं। आगरा समेत ताज ट्रिपेजियम जोन के सभी जिलों में एडहॉक मोरोटोरियम के कारण केवल व्हाइट कैटेगरी के उद्योग ही लगाने की अनुमति दी गई। व्हाइट कैटेगरी में केवल 36 उद्योग ही रखे गए,
जबकि ग्रीन में 63 उद्योग रखे गए।
व्हाइट कैटेगरी में जो उद्योग रखे गए, उससे आगरा में प्रचलित जूता, पेठा, फाउंड्री, जनरेटर, होटल, कोल्ड स्टोरेज, अस्पताल, क्लीनिक, लेबोरेटरी आदि की स्थापना नहीं हो रही थी। ढाई साल से नई यूनिट नहीं लग पा रही थीं और हजारों करोड़ों रुपये का निवेश अटक गया था।
व्हाइट कैटेगरी में अब यह होंगे उद्योग
बिना बिजली खिलौने, गुड़िया बनाना, मधुमक्खी पालन, बायो गैस, 100 किग्रा. प्रति दिन वाली बिस्किट, पेस्ट्रीज केक बेकरी, किताबों की बाइंडिंग, मोमबत्ती निर्माण, तंबाकू की पैकिंग, कोटेड इलेक्ट्रोड निर्माण, डेयरी फार्मिंग, मसालों की सूखी पिसाई, एंब्रोइडरी, फिनिश्ड लेदर गुड्स, फिश पांड्स, फ़्यूल डिस्पेंसिंग, स्वर्णकार दुकानें, ग्रीन हाउस, फाउंड्री बिना मोटर, पंप निर्माण, मोजेक टाइल्स-सीमेंट पाइप्स निर्माण, ट्रांसफार्मर निर्माण, घड़ियां, सीमेंट ब्लॉक्स निर्माण, आईटी उद्योग, हैंडीक्राफ्ट असेंबली, मशरूम उत्पादन, कोल्हू-एक्सपेलर से तेल निकालना, पैकिंग, कृषि उत्पादों की पैकिंग, पेंट वार्निश मिक्सिंग, फोटो आईकार्ड प्रिंटिंग, प्रिंटिंग प्रेस, नॉन बेडेड क्लीनिक, डिस्पेंसरीज, फोरेंसिक लेबोरेटरी, इमेजिंग सेंटर, अचार उत्पादन, खाद्य तेल का आयात, स्टोरेज, एक एमवीए तक के गैस जनरेटर, 15 केवीए तक के डीजल जनरेटर, माचिस, खेलकूद का सामान, शहद की प्रोसेसिंग, मछली का जाल, गुटखा पैकिंग यूनिट, आटा चक्की, मसाला चक्की, वजन तौलने वाली मशीनें, वेल्डिंग इलेक्ट्रोड, कोरुगेटेड बाक्स, छाता, रेनकोट, टाइपिंग सेंटर, सेरीकल्चर, 36 सीट से कम के रेस्टोरेंट, 5 हजार वर्ग मीटर के प्रोजेक्ट, पीवीसी मोल्डिंग, मिनरल वाटर, वाशिंग पावडर, बीडी, सिगार, जर्दा निर्माण, रिक्शा, तांगा बैलगाड़ी निर्माण, बैग, ब्रीफ केस, इलेक्ट्रिक मोटर, आल्टरनेटर असेंबली, शीट मेटल फेब्रिकेशन, डीजल इंजन असेंबली, बूट पालिश, इलेक्ट्रोप्लेटिंग के बिना इमीटेशन ज्वैलरी, व्हील चेयर, टायलेट पेपर रोल्स, शीट, पेपर नैपकिन्स, लेटेक्स रबर बैलून, टीक शीट प्लाईवुड, स्टेपल मशीन, सिलाई मशीन असेंबली, पीवीसी पाइप, केबल, वायर, आरसीसी पाइप, फिटिंग्स आदि।
ग्रीन कैटेगरी में शामिल उद्योग
5 एमवीए से छोटे गैस जनरेटर, गैस ओवन वाली बेकरी, गैस आधारित फूड प्रोसेसिंग, गैस बॉयलर वाले टूथ पाउडर, पेस्ट, टैल्कम पाउडर, कास्मेटिक्स, गैस वाले डेरी, गैस आधारित सिरेमिक्स, आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक दवाएं, आइसक्रीम, फिश फूड, पेठा, फाउंड्री, गैस के तंदूर वाले रेस्टोरेंट, प्लाईबोर्ड निर्माण, रोगिंग मिल, 20 कमरों तक के होटल, सैंड ब्लास्टिंग, गैस फर्नेश वाली सोडियम सिलिकेट निर्माण, 30 कमरों से कम के बेडेड अस्पताल, ब्लीचिंग, डाई के बिना हौजरी-गारमेंट उत्पादन आदि शामिल हैं।
अमर उजाला ने लड़ी उद्योगों की लड़ाई
टीटीजेड में केवल व्हाइट कैटेगरी के उद्योग और एडहॉक मोरोटोरियम से उद्योगों को नुकसान का सबसे पहले मामला अमर उजाला ने उठाया और अनवरत अब तक उद्यमियों के साथ खड़ा रहा।
पर्यावरणविद् उमेश शर्मा ने कहा कि टीटीजेड के उद्यमियों के संघर्ष की यह बड़ी जीत है। हमने पर्यावरण मंत्रालय से लेकर स्टेट बोर्ड तक तर्क रखे। गैस आधारित उद्योगों के वर्गीकरण को हमारी मांग पर ही शामिल किया गया। अब हम एडहॉक मोरोटोरियम के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार हैं।
लघु उद्योग भारती के भुवेश अग्रवाल ने कहा कि लघु उद्योग भारती ने लगातार लखनऊ, दिल्ली में अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया। व्हाइट कैटेगरी में उद्योग बढ़ाने से टीटीजेड को फायदा होगा। खासकर जूता, इंजन, होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल के लिए खासी राहत मिलेगी।