आगरा की जिन जिमों में हजारों रुपये माह की फीस देकर लोग पसीना बहाकर शरीर को सुडौल बना रहे हैं। ज्यादातर अवैध रूप से संचालित हैं। गली-मोहल्लों में जिम खुल गई हैं। जिम के उपकरण मानव सुरक्षा के लिहाज से ठीक हैं या नहीं, ट्रेनर योग्य है या नहीं। इन मानकों को भी पलीता लग रहा है। जिले में सिर्फ चार जिम पंजीकृत हैं, जिनमें ताज होटल, होटल कोर्टियाड, ताज होटल कन्वेंशन, स्पोर्ट्स बज विजयनगर हैं।
इसका असर सरकारी कोष पर भी पड़ रहा है। जिम संचालन के लिए हर साल 15 हजार रुपये की फीस के साथ अनुमतिपत्र जारी होता है। यह 15 हजार रुपये जिला खेल प्रोत्साहन समिति के खाते में जमा कराने होते हैं। इन पैसों से खेल के क्षेत्र में सरकारी सुविधाओं से बढ़ावा दिया जाता है। कोच रखे जाते हैं। मगर, इस पैसे को जिम संचालक और विभाग मिलकर डकार रहा है। अवैध जिम संचालन से हर साल 25 लाख रुपये करीब का चूना लग रहा है। जिले में करीब 250 जिम संचालित हैं। इतना ही नहीं, अधिकारी निरीक्षण तक को नहीं जाते हैं।
डिग्रीधारक होना चाहिए ट्रेनर
प्रभारी क्षेत्रीय क्रीडा अधिकारी सविता श्रीवास्तव ने बताया कि जिम ट्रेनर होने के लिए राष्ट्रीय खिलाड़ी हो या फिर प्रोफेशनल डिग्री यानी फिटनेस संबंधी विषयों में ग्रेजुएशन या डिप्लोमा होनी चाहिए। इसके अलावा बीपीएड और एमपीएड डिग्री धारक भी जिम ट्रेनर/कोच बन सकते हैं।हादसा हुआ
तो कौन होगा जिम्मेदार
सवाल यह भी है कि अगर इन जिम में कोई हादसा हो जाता है, तो उसके लिए जिम्मेदार कौन होगा। इसके अलावा जिम संचालकों की मोटी कमाई के लालच में प्रशिक्षुओं को सप्लीमेंट पाउडर दिए जाते हैं। इनके विषय में जानकारी रखने के लिए वहां कोई न्यूट्रिशियन नहीं होता है। सप्लीमेंट के कई घातक परिणाम सामने आ चुके हैं।
अनुमति लेनी जरूरी
क्षेत्रीय क्रीडा अधिकारी सविता श्रीवास्तव ने बताया कि 'जिम संचालन के लिए क्षेत्रीय क्रीडा अधिकारी कार्यालय से अनुमति लेनी होती है। इसकी एवज में 15 हजार रुपये प्रतिवर्ष जिला खेल प्रोत्साहन समिति के खाते में जमा कराने होते हैं। क्षेत्रीय कार्यालय के रिकॉर्ड में सिर्फ चार जिम पंजीकृत हैं।'