उत्तर प्रदेश के आगरा में 15 दिन से बंद चल रहे 36 एमएलडी बिचपुरी सदरवन एसटीपी के कारण आवास विकास, शास्त्रीपुरम, बोदला, शाहगंज क्षेत्र में सीवर सड़कों पर भरा है। वहीं जलनिगम की सी एंड डीएस इकाई ने मोटरें खराब होने पर सीवर ट्रीटमेंट की जगह बाईपास कर नहर में छोड़ दिया है। एसटीपी से कीचड़ और काला दुर्गंध वाला सीवर नहर में छोड़ने से पूरे क्षेत्र में बदबू फैल गई है। जिन किसानों के खेत एसटीपी और नहर के पास हैं, वह सिंचाई के लिए इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे।
जलनिगम की निर्माण इकाई शास्त्रीपुरम क्षेत्र में सीवर लाइन बिछा चुकी है, पर इसके कनेक्शन 15 दिनों से ठप पड़े हुए हैं। निर्माण इकाई के प्रोजेक्ट मैनेजर स्वतंत्र सिंह ने बताया कि सीवर मैनहोल ऊपर तक भरे होने के कारण कनेक्शन का काम ठप पड़ा हुआ है। शास्त्रीपुरम की सीवर लाइन बिचपुरी लाइन में ही जोड़नी है। पंपिंग शुरू हो और एसटीपी चले, तब वह काम करा सकेंगे। सी एंड डीएस की लापरवाही की वजह से आठ हजार कनेक्शन का काम रुका हुआ है।
जलनिगम की सी एंड डीएस इकाई ने नहर में ट्रीटमेंट की जगह सीवर को सीधे ही छोड़ दिया है। ऐसे ही एक मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आगरा विकास प्राधिकरण पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। रजरई, शमसाबाद रोड की कॉलोनियों में भी सीवर खुले मैदान और नालियों में छोड़ दिया गया।
इस पर नालंदा टाउन के निवासी ने दायर याचिका पर एनजीटी ने एडीए पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया तो बाद में एडीए ने नालंदा टाउन के डेवलपर पर ढाई करोड़ रुपये का जुर्माना इस मामले में लगाया। इसके बाद ही यूपीपीसीबी, एडीए, नगर निगम की संयुक्त टीम ने 63 कालोनियों में सर्वे किया।