आगरा। दो पुलिसकर्मियों को गोली मारकर राइफल लूटने जैसी घटना को अंजाम देने वाला भूरा पिता की दुकान पर साइकिलों की मरम्मत और पंचर जोड़ने का काम करता था। मजबूत कद काठी का होने के कारण बचपन से ही साथियों पर रौब जमाता था। गांव में फूस बेचने आने वाले युवकों से ड्राइविंग सीखी थी। लूट, अपहरण और फिरौती वसूलने के काम करने लगा। घटना के बाद वह कभी अपने परिवार के किसी व्यक्ति के संपर्क में नहीं आया था।
भूरा की 80 वर्षीय मां मुन्नी देवी ने बताया कि बेटे ने घटना से छह माह पूर्व दोस्तों के साथ बिहार जाकर लड़की खरीद कर शादी की थी। अपराध की दुनिया में जाने के बाद कभी-कभी ही घर आता था। घटना से दो दिन पहले उसकी भाभी अमजानो की मौत हुई थी लेकिन भूरा नहीं आया था। घटना के चार महीने बाद उसकी पत्नी अपने घर बिहार चली गई थी। उसके बाद पत्नी से भी संपर्क नहीं हुआ। भूरा जिंदा है या नहीं मालूम था। 15 वर्ष पहले पुलिस उन्हें और छोटे बेटे असलम को लेकर थाना खेरागढ़ गई थी। वहां भी पुलिस को भूरा का कोई पता नहीं होने की जानकारी दी थी। असलम आगरा में ऑटो चलाता है। गांव में बकरी पालन कर जीवन यापन कर रही हैं।
भूरा के बड़े भाई ईदू की चार वर्ष पहले हादसे में मौत हो गई थी। भतीजे सुलेमान उर्फ होल्टू ने बताया कि भूरा की सबसे छोटी एक बहन समीना है। वह फलों का व्यापार करते हैं। उनके दादा ने घटना से 12 वर्ष पहले गृह क्लेश के कारण आत्महत्या कर ली थी। दादा साबू गांव में पीपल के पेड़ के नीचे साइकिल मरम्मत की दुकान चलाते थे। पिता और चाचा भूरा उनके साथ ही काम करते थे। भूरा के दोस्त रहे मुन्ना ने बताया कि उसका पढ़ाई में मन नहीं था। भूरा पिता के साथ पंचर बनाता था। मजबूत काठी का होने के कारण अन्य बच्चे डरते थे। छोटी सी बात पर मारपीट करने लगता था।
पत्नी के अलावा किसी से नहीं किया संपर्क
भूरा ने घटना के बाद परिवार के किसी व्यक्ति से संपर्क नहीं किया। भूरा के रिश्तेदार नन्हें की पत्नी भूरा की पत्नी के संपर्क में थी। घटना के बाद भूरा ने उसके जरिये ही पत्नी से संपर्क किया था।