प्रो. विनय पाठक
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन बीएचएमएस (बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी) पुनर्मूल्यांकन का परिणाम निरस्त कर सकता है। इसके लिए एसटीएफ की रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है। प्रो. विनय पाठक के कार्यकाल में फेल छात्रों को पुनर्मूल्यांकन में पास कर दिया गया था। इस मामले की जांच एसटीएफ कर रही है। 14 मेडिकल कॉलेजों के 1500 से अधिक छात्र (80 प्रतिशत से अधिक) मुख्य परीक्षा में फेल हो गए थे। महज 20 फीसदी छात्र ही पास हुए।
प्रभारी कुलपति रहे प्रो. विनय पाठक ने इन छात्रों का पुनर्मूल्यांकन करा दिया, जो विश्वविद्यालय की नियमावली में ही नहीं है। पुनर्मूल्यांकन के बाद जब परिणाम जारी हुआ तो इसमें सभी छात्र पास हो गए। इन छात्रों को पूर्व के प्राप्तांकों से डेढ़ से दोगुना तक अंक दिए गए हैं। इसमें निजी मेडिकल कॉलेज संचालकों से रुपये लेकर पुनर्मूल्यांकन में फर्जीवाड़े की शिकायत भी हुई।
इस पर एसटीएफ ने इसकी जांच शुरू कर दी है। इस निर्णय के खिलाफ परीक्षा समिति में भी खूब हंगामा हुआ और इसका अनुमोदन नहीं किया। इस मामले में राजभवन और शासन तक रिपोर्ट गई है। ऐसे में अब विश्वविद्यालय प्रशासन पुनर्मूल्यांकन का परिणाम निरस्त करने पर विचार कर रहा है। विश्वविद्यालय में इस बाबत आला अधिकारियों के साथ बैठक कर मंथन भी हो चुका है। एसटीएफ की रिपोर्ट आते ही परिणाम निरस्त करते हुए पूर्व का परिणाम बहाल किए जाने की संभावना है।
एसटीएफ की जांच रिपोर्ट का इंतजार
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने बताया कि बीएचएमएस मेें फेल छात्रों को पुनर्मूल्यांकन में पास करने की जांच एसटीएफ कर रही है। एसटीएफ की जांच रिपोर्ट मिलने का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद पुनर्मूल्यांकन का परिणाम निरस्त किया जा सकता है।