फोटो 2 भव्य कलश यात्रा के साथ शुरू हुई श्रीमद्भागवत कथा, भक्ति में सराबोर हुए श्रद्धालु
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बाह। पुरा कनेरा में मंगल कलश यात्रा के बाद भागवत कथा पर प्रवचन करते हुए ब्रजभूषण शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने का लाभ तभी है, जब हम इसे अपने जीवन में उतारें और उसी के अनुरूप व्यवहार करें। उन्होंने कहा कि कथा सुनने से मानव जीवन में संस्कार का उदय होता है। भगवान से जुड़ने का उत्तम साधन है भजन। जीवन में कितनी भी विकट परिस्थिति क्यों न आ जाएं, मुनष्य को अपना धर्म व संस्कार नहीं छोड़ना चाहिए। इससे पहले गांव के शिवशंकर मंदिर से कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ। गाजे बाजे के साथ निकली कलश यात्रा पर जगह जगह पर पुष्प वर्षा की गई। इस दौरान परीक्षत डॉ. होराम सिंह त्यागी, सुमन त्यागी, सुनील त्यागी, सुशील, सुरेश, रामनरेश, गगन चौबे, भविष्य त्यागी, हिमांशू त्यागी, छाया, अनन्या, विनीत, ओमप्रकाश आदि रहे।
वहीं, इरादतनगर क्षेत्र के गांव महाव में चल रही श्रीमद भागवत कथा के पांचवे दिन बृहस्पतिवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यास आचार्य पण्डित मातादीन शास्त्री ने जैसे ही भगवान के जन्म की कथा शुरू की, पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो,जय कन्हैया लाल की, के उदघोष से गुंजायमान हो उठा। जन्मोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया। महिलाओं ने गोपियों के स्वरूप में भजनों पर थिरकते हुए उत्सव का आनंद लिया।
खेरागढ़। गांव कुकंडई में बृहस्पतिवार को भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। पीत वस्त्र धारण किए सैकड़ों महिलाएं सिर पर कलश रख भक्ति भाव से कलश यात्रा में शामिल हुईं। भगवताचार्य ब्रजेश्वरी देवी ने प्रथम दिन भागवत महात्म्य एवं भगवान श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुन श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।आयोजक एवं कथा परीक्षित सुनील लोधी व उनकी पत्नी रामदुलारी ने बताया कि कथा 27 मई तक चलेगी। 28 मई को भंडारा होगा।
वहीं,थाना बसई अरेला क्षेत्र की ग्राम पंचायत नगला भरी के मजरा पुरा रामनीक में धार्मिक आस्था और उत्साह के बीच श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ किया गया। कथा के प्रथम दिन गांव में 101 कलशों के साथ भव्य एवं आकर्षक कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें पीतांबर वस्त्र धारण किए श्रद्धालु महिलाएं और बालिकाएं सिर पर मंगल कलश लेकर भक्ति गीतों पर झूमती नजर आईं। कलश यात्रा के मुख्य यजमान (परीक्षित) रामऔतार टीकैत एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रामा देवी ने श्रद्धा भाव से श्रीमद्भागवत ग्रंथ को सिर पर धारण कर यात्रा में सहभागिता की।