मथुरा के जवाहर बाग की घटना में घायल हुए लोगों को रात दो बजे एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी लाया गया। सुबह तक घायलों की संख्या 55 से ज्यादा हो गई। इससे व्यवस्थाएं चरमरा गईं। मरीजों के लिए बेड नहीं बचे। एक बेड पर दो-दो मरीज को लिटाया गया। इसके अलावा दवा और इंजेक्शन की भी कमी पड़ गई। पहले से भर्ती मरीजों को मेडिसिन और हड्डी विभाग में शिफ्ट करना पड़ गया।
बता दें, घायलों के आने की जानकारी पर इमरजेंसी में पहले से ही तैयारी कर ली गई थी। सीओ कोतवाली और एसओ एमएम गेट फोर्स के साथ पहुंच गए थे। डाक्टरों की टीम को भी बुला लिया गया था। ज्यादातर लोग गोली लगने से घायल हुए थे। हाथ और पैर में फैक्चर वाले मरीजों की संख्या भी ज्यादा रही। ऐसे में दवा-पट्टी का भी अलग से इंतजाम करना पड़ा। मेडिकल कालेज स्टाफ ने व्यवस्थाओें में देरी नहीं की। सुबह तक 55 से ज्यादा मरीज आ चुके थे। इससे इमरजेंसी में बेड भी कम पड़ गए। कई मरीज प्राथमिक उपचार के बाद जमीन पर ही लेटे रहे।
एसएन की घेराबंदी
इमरजेंसी पर एमएम गेट और नाई की मंडी पुलिस को लगाया गया था। इसके अलावा भी फोर्स तैनात की गई थी। पुलिस घायलों पर नजर रखे हुए थी।
यह आए मरीज
झिक्कू चौहान, रामेश्वर, महेश, बरातीलाल, बिंदई पाल, नंदलाल, देव सिंह, सोमेंद्र, नंदराम, रामपाल, अजय, सतपाल, दयाशंकर, कौशल किशोर, वीरबहादुर, सियाराम, फूलमन, मनोज, देव सिंह, शिवनाथ, राममिलन, रामबहादुर, प्रहलाद, अनमोल, किशोर, विंदर, मिंटू सिंह, कंचन सिंह, श्याम, सुखलाल, नंदलाल, रामपाल, लाल बिहारी, रामप्रीत, सियाराम, वीरबहादुर, हजारीलाल, चंद्रवीर, जगदीश, कृपाल सिंह, रामसेवक, शिशुपाल, गिरी, राधेश्याम, रविलाल, सुनील, लाखन सिंह, रामकरन, केशव सिंह, माया, कपिल शर्मा, प्रदीप, विजयपाल, अनूप सिंह, मेवालाल, रिषीलाल, नरपत, पंचम लाल आदि हैं।