बीएड और एमएड के छात्रों के लिए राहतभरी खबर है। बीएड की परीक्षा 17 मार्च और एमएड की परीक्षा 20 मार्च से हो सकती हैं। वहीं, परीक्षा समिति ने बिना काउंसलिंग वाले 6700 छात्रोें के मामले पर निर्णय के लिए कुलपति और कुलसचिव को तीन दिन का समय दिया है कि इनकी परीक्षा साथ कराई जाए या बाद में।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुख्य अधिवक्ता की सलाह के बाद कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के 25 नवंबर, 2013 और ज्योति मिश्रा बनाम यूपी राज्य के मामले में हाईकोर्ट के 28 जुलाई 2014 के निर्णय के अनुपालन में सीधे प्रवेश लेने वाले (बिना काउंसलिंग के) छात्रों को परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया जा सकता है। उन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय पांच बिंदुओं पर खरा उतरना होगा। साथ ही प्रवेश परीक्षा न देने वालों और 16 सितंबर, 2013 के बाद सीधे प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को मौका नहीं दिया जाएगा।
बता दें, निजी कालेजों में सीधे प्रवेश लेने वाले 6700 बीएड छात्रों को विश्वविद्यालय ने 30 जनवरी से होने वाली परीक्षा में शामिल न करने का निर्णय किया था। इस निर्णय के विरोध के बाद परीक्षा स्थगित कर दी गई थी। कालेजों से ऐसे छात्राें का ब्योरा और सीधे प्रवेश देने के संबंध में शासनादेश व साक्ष्य मांगे थे।