डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय ने शुक्रवार से शुरू होने वाली बीएड सत्र 2014 की परीक्षा को स्थगित कर दिया है। बिना काउंसलिंग के निजी कालेजों में प्रवेश लेने वाले 6700 छात्र-छात्राओं की परीक्षा नहीं कराए जाने पर निजी कालेजों और छात्रों के विरोध के बाद कुलपति ने यह निर्णय लिया। परीक्षा की अगली तिथि अभी तय नहीं की गई है।
निजी कालेजों के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को कुलपति प्रो. मुजम्मिल से उनके आवास पर मुलाकात की और उन्हें शासनादेश का हवाला देकर परीक्षा स्थगित करने को कहा। वहीं विवि के निर्णय से प्रभावित दर्जनों छात्र-छात्राओं ने भी आवास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति को बताया कि उन्होंने हाईकोर्ट और शासन के आदेशों के तहत ही छात्रों के प्रवेश लिए हैं। इस पर कुलपति ने कहा कि कालेजों से प्रत्यावेदन लेने, शासनादेशों का परीक्षण करने और विधिक राय लेने के बाद परीक्षा की अगली तिथि निर्धारित की जाएगी।
मालूम हो कि सत्र 2014 में आगरा और अलीगढ़ मंडल के बीएड कालेजों में 19 हजार से ज्यादा छात्राें ने प्रवेश लिया है। इनमें बिना काउंसलिंग के प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या लगभग एक तिहाई है। विश्वविद्यालय ने इन छात्रों की परीक्षा न कराने का निर्णय लिया था। कालेजों के दबाव बनाने के बाद मंजूरी के लिए शासन को कुलपति ने पत्र लिखा था, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला। परीक्षा 30 जनवरी से शुरू होकर चार फरवरी तक तकरीबन तीन दर्जन केंद्रों पर होनी थीं। कुल छह पेपर थे। शुक्रवार को फिलोसॉफिकल एंड सोशियोलॉजिकल एजुकेशन का पेपर था। परीक्षा के लिए दोनों मंडलों में दस नोडल केंद्र बनाए गए थे।
मजदूरी कर फीस भरी, फिर भी मिला धोखा
सपा छात्रसभा के नेतृत्व में कुलपति आवास के बाहर प्रदर्शन कर रही इलाहाबाद की छात्रा पारुल केशरवानी ने बताया कि कालेज ने प्रवेश संबंधित विज्ञापन अखबार में जारी किया था। परीक्षा कराने का पूरा भरोसा दिलाया था। 51 हजार रुपये फीस ली और परीक्षा फार्म के नाम पर भी पांच से आठ हजार रुपये ले लिए। वहीं नैनीताल की रचना ने कहा कि उनके साथ भी कालेज ने धोखा किया है। गुंजेश कुमारी ने कहा कि बमुश्किल अपने भाईयों की मदद से उन्होंने फीस जमा की थी। आगरा में गुजर बसर को एक स्कूल में पार्ट टाइम पढ़ाती हैं। बहराइच के अमरेश कुमार ने बताया कि वह टाइल कारखाने में काम करते हैं। कई घंटे की मजदूरी के बाद उन्हें 200 रुपये मिलते हैं। कालेज ने उनसे भी 51 हजार की फीस ली। अगर परीक्षा नहीं हुई तो वह कहीं के नही रहेंगे। प्रदीप कुमार ने भी कहा कि वह एक स्कूल में दो हजार रुपये महीने की नौकरी करते हैं। ऐसे में उनकी परीक्षा न होने से वह सदमे में हैं।
प्रत्यावेदन के लिए कालेजों को पांच फरवरी तक का समय
विवि के जनसंपर्क अधिकारी डा. मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक निजी कालेजों को पांच फरवरी तक प्रत्यावेदन दाखिल करने का समय दिया गया है। उन्हें यह बताना होगा कि क्यों उनके कालेज के बिना काउंसलिंग वाले छात्रों को परीक्षा में शामिल किया जाए। प्रत्यावेदन के साथ कोई साक्ष्य या अभिलेख भी देना होगा।
कालेजों ने डकारी शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम
इस पूरे मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। निजी बीएड कालेजों ने करोड़ों की शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम डकार ली है। अनुसूचित जाति, जनजाति और आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग के छात्रों को मिलने वाले 56 हजार रुपये शुल्क प्रतिपूर्ति के चक्कर में इन आरक्षित वर्ग के तमाम छात्रों को नियम विरुद्ध प्रवेश दे दिया गया। विश्वविद्यालय से भले ही इन छात्रों को कोई नामांकन संख्या न मिली हो, लेकिन कालेजों को ऐसे सैकड़ों छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम मिल गई। जबकि कालेजों ने इनकी फीस विश्वविद्यालय में जमा ही नहीं की।
छात्र नेता बोले, हमने रोकी परीक्षा
बीएड छात्रों की परीक्षा स्थगित करने के निर्णय को सपा छात्रनेता अपनी उपलब्धि बता रहे हैं। जिलाध्यक्ष आलोक यादव, शहर अध्यक्ष निर्वेश शर्मा, ब्रजेश शर्मा का कहना है कि कुलपति आवास के बाहर बीएड छात्रों ने उनके नेतृत्व में प्रदर्शन किया। यह निर्णय विवि प्रशासन को सभा की एकजुटता के कारण लेना पड़ा है।