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Education: बीएड में लागू होगा एआई आधारित शिक्षण, भविष्य के शिक्षक बनेंगे हाईटेक

Wed, 04 Feb 2026 09:58 AM IST
धीरेन्द्र सिंह यथार्थ मिश्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

बीएड के वर्ष 2026-27 से सभी विषयों में एआई आधारित शिक्षण, पाठ्यक्रम बनाने की अनुमति मिल गई है। 
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) - फोटो : AI
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विस्तार
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बीएड की पढ़ाई अब आधुनिक तकनीक से जुड़ने जा रही है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध जिन महाविद्यालयों में बीएड पाठ्यक्रम संचालित हो रहा है, वहां अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित शिक्षण को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। आने वाले शैक्षिक सत्र 2026-27 से बीएड पाठ्यक्रम में एआई को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा, जिससे होने वाले शिक्षकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जा सके। और नवाचार में मजबूत हो जाएं।
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पूर्व बीएड कमेटी के सदस्य और आरबीएस कॉलेज शिक्षा संकाय के विभागाध्यक्ष प्रो. बसंत सिंह ने बताया कि तेजी से बढ़ती तकनीक और एआई के व्यापक उपयोग को देखते हुए शिक्षकों का अपडेट होना जरूरी है। नए सत्र के पाठ्यक्रम के लिए कमेटी गठित की जाएगी। इसके बाद विश्वविद्यालय से संबद्ध बीएड संचालित महाविद्यालयों के लिए पाठ्यक्रम जारी कर दिया जाएगा।

इसी उद्देश्य से बीएड के सभी विषयों में एआई के माध्यम से लेसन प्लानिंग, शिक्षण सामग्री निर्माण, व्यक्तिगत शिक्षण, मूल्यांकन, माइक्रो टीचिंग और शोध कार्य को शामिल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एआई के प्रयोग से छात्रों का सर्वांगीण विकास होगा, जिसमें व्यक्तिगत, सामाजिक और तकनीकी विकास के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहभागिता की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। मल्टीमीडिया, मल्टी अप्रोच और एआई आधारित कक्षाओं के माध्यम से बीएड छात्रों को भविष्य की डिजिटल शिक्षा प्रणाली के लिए तैयार किया जाएगा। प्रो. बसंत ने बताया कि विश्वविद्यालय से पाठ्यक्रम बनाने की अनुमति मिल गई है। नए सत्र से इसे जोड़ दिया जाएगा। फिलहाल इसे बीएड में ही लागू किया जाएगा और उसके बाद एमएड पर विचार किया जाएगा। 
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अगले साल से सेमेस्टर प्रणाली लागू
एमएड की तरह बीएड की भी सेमेस्टर प्रणाली 2026-27 सत्र से लागू हो जाएगी। काफी समय से प्रोफेसर इस प्रकार की मांग कर रहे थे। सोमवार को परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओमप्रकाश ने लिखित आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी है।
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ये होंगी खासियत
- शिक्षण प्रक्रिया आधुनिक
- समय की होगी बचत
- शिक्षण बनेगी रोचक और इंटरेक्टिव
- डिजिटल शिक्षा के लिए होंगे तैयार
- शोध नवाचार को बढ़ावा
 
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