कीठम के भालू संरक्षण केंद्र की मान्यता पर तलवार लटक गई है। पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की टीम के निरीक्षण में भालू संरक्षण केंद्र में कई खामियां पाई गई थीं। 16 पेज की इस रिपोर्ट में इस केंद्र के संचालक वाइल्ड लाइफ एसओएस को व्यवस्थाएं सुधारने की चेतावनी दी गई थी। अब सेंट्रल जू अथारिटी की टीम गुरुवार को फिर से निरीक्षण करने आ रही है।
यह टीम देखेगी कि तय वक्त में उन खामियों को अब तक दूर किया गया या नहीं। दरअसल, भालू संरक्षण केंद्र में बरती जा रही लापरवाही पर पर्यावरण मंत्रालय और सेंट्रल जू अथारिटी के तीन वरिष्ठ अधिकारियों की टेढ़ी नजर है। पिछली बार सेंटर की खामियों को उजागर करने वाले अधिकारी इस बार निरीक्षण की टीम में नहीं है।
कीठम झील के पास 17 हेक्टेयर जमीन पर भालू संरक्षण केंद्र का संचालन एनजीओ वाइल्ड लाइफ एसओएस कर रहा है। हाल में ही वन्यजीव अधिकारियों की टीम ने सेंटर का निरीक्षण कर पाया था कि मानक के मुताबिक भालू संरक्षण केंद्र में काम नहीं हो रहा। भालुओं के साथ अन्य जानवरों को रखा गया है, जिससे एक दूसरे को इन्फेक्शन का खतरा है। हिरन और सीही भी साथ रखे गए हैं। टीम ने केंद्र के अंदर बने स्टाफ रूम, गार्ड रूम हटाने के साथ हरियाली बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
भालुओं के लिए अलग-अलग कमरे बनाने को कहा था, जबकि यहां 20×12 के हॉल में एक साथ चार-चार भालू रहते हैं। कोरोंटाइन न होने पर टीम ने अपनी रिपोर्ट में नाराजगी जताई थी। वाइल्ड लाइफ एसओएस के सेंटर प्रभारी डा. बैजूराज के मुताबिक, टीम ने जो संस्तुति की थीं, उनके मुताबिक बदलाव किए गए हैं। टीम अब आ रही है तो सेंटर की व्यवस्थाएं देख लेगी। हमने सरकार के आदेश के मुताबिक ही जानवरों को शिफ्ट किया है।