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बैकुंठ चौदस पर बटेश्वर में दीपदान

Mon, 14 Nov 2016 12:56 AM IST
बैकुंठ चौदस पर बटेश्वर में दीपदान
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बैकुंठ चौदस पर बटेश्वर में दीपदान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अपने पूर्वजों की मोक्ष के लिए बटेश्वर तीर्थ के घाटों पर बैकुंठ चौदस की बेला पर श्रृद्धालुओं ने बड़ी तादाद में दीपदान किया। जलते हुये दीपकों की रोशनी से यमुना की लहरें झिलमिला रही थीं। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक की चौदस को बटेश्वर में दीपदान करने से साल भर में प्राण त्यागने वाले पूर्वजों के लिए बैकुंठ के द्वार खुल जाते हैं। इसी मान्यता के चलते रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु बटेश्वर तीर्थ पहुंचे। ब्रह्मलाल जी मन्दिर में मत्था टेका और दीप जलाये। पूर्वजों के मोक्ष की कामना की। शिव मन्दिर शृंखला के तट पर जलते हुये दीपक यमुना नदी में बहाये। सांझ ढलने से देर रात तक यह सिलसिला चला। यमुना की लहरों से अठखेलियां करते दीपकों की झिलमिलाहट देखकर स्वर्ग से पूर्वज भी हर्षित हुये बिना नहीं रह सके होंगे। 
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कार्तिक पूर्णिमा पर बन रहा कृतिका और भरणी नक्षत्र संयोग
बाह। सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा पर कृत्तिका और भरणी नक्षत्र का मिलन संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य शिव शरण पारासर ने बताया कि जब कृतिका नक्षत्र हो तो यह ‘महाकार्तिकी’ होती है। भरणी नक्षत्र होने पर विशेष रूप से फलदायी हो जाती है। इस तिथि को ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा और आदित्य आदि का दिन भी माना जाता है। आज के दिन किए जाने वाले स्नान, दान, हवन, यज्ञ व उपासना का अनंत फल प्राप्त होता है। शिवजी के अभिषेक से स्वास्थ्य और आयु में बढ़ोतरी, दीपदान से भय से मुक्ति और सूर्य आराधना से लोकप्रियता और मान सम्मान की प्राप्ति होती है। 

नागा साधुओं का दूसरा शाही स्नान आज 
बटेश्वर मेले में नागा साधुओं का दूसरा शाही स्नान भी सोमवार को होगा। स्नान से पहले साधु संत तीर्थ क्षेत्र में सात कोस की परिक्रमा करेंगे। 

ब्रज की काशी बटेश्वर में आस्था का केंद्र है ऊखल
बाह। रेणुका शूकर: काशी काली काल बटेश्वरम। कालिंजर महाकाल उक्खला नव प्रकीत्र्यु: ।। बौद्ध ग्रंथ अवदान कल्पता में देश के जिन नौ ऊखल क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। उनमें से दो बृज की काशी बटेश्वर में होने से तीर्थ श्रद्घालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
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साहित्यकार डॉ. बीपी मिश्र कहते है कि बटेश्वर में दो ऊखल क्षेत्र उत्तर और दक्षिण में हैं। (ऊखल क्षेत्र में प्रलय काल में धरती से स्वत: ही जल की धारा फूटती है। बटेश्वर में आज भी 10 से 15 हाथ की गहराई पर भूगर्भ जल मौजूद है।) दो ऊखल क्षेत्र होने के कारण बटेश्वर दर्शन विशेष पुण्य फलदायी होता है। दो ऊखल होने के कारण ही कार्तिक पूर्णिमा पर यहां स्नान के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। पौराणिक मान्यता है कि यहां पर स्नान दर्शन पूजन से एक हजार गायों के दान का पुण्य फल मिलता है। द्वापर काल में महाभारत के नायक योगेश्वर कृष्ण की पैत्रिक भूमि शौरीपुर (बटेश्वर) उनके पितामह सूरसेन महाराज की राजधानी रही है। उनके पुत्र वसुदेव की जन्मस्थली होने का गौरव भी यह भूमि रखती है। भागवत पुराण के अनुसार वसुदेव की बरात यहीं से मथुरा गई थी। भगवान नेमीनाथ का जन्म भी यहीं हुआ। रिषभ देव पार्श्वनाथ और भगवान महावीर ने अपने पद रज से इस भूमि को पवित्र किया था। यहां के प्राचीन खंडहरों में दो मोहल्लों के नाम पदमन खेड़ा और औंधखेड़ा श्रीकृष्ण के पुत्र और पौत्र के नाम पर रखे गये। बटेश्वर का एतिहासिक महत्व भी कम नहीं है। 15वीं शताब्दी में सिकंदर लोदी को इसी भूमि पर भदावर नरेशों के हाथ मुंह की खानी पड़ी थी। शेरशाह सूरी का भी आक्रमण केन्द्र बटेश्वर रहा है। उन्होंने ही हथकांत का किला बनवाया था। पानीपत के युद्ध में शहीद हुये सेनानियों की स्मृति में मराठा सरदार नारु  शंकर ने बटेश्वर में मन्दिर का निर्माण कराया था। बटेश्वर नगर कई बार उजड़ा और बसा है। वर्तमान शिव मन्दिर शृंखला को 1646 में तत्कालीन भदावर नरेश बदन सिंह एक कोस लंबा अर्द्ध चंद्राकार बांध बनवाकर अस्तित्व में लाये थे। यहां पर यमुना नदी शिव मन्दिर शृंखला का आचमन कर उल्टी धारा में बहती है। मोक्ष दायिनी यमुना में कार्तिक पूर्णिमा की पावन बेला पर लाखों श्रद्धालु स्नान कर भोले के दर पर मत्था टेेकेंगे। 

मेले में अव्यवस्थाएं हावी
बाह। मेला परिसर में जिला पंचायत को जिन 250 शौचालयों का निर्माण कराया जाना चाहिये था वह कहीं दिख नहीं रहे हैं। इसके चलते श्रद्धालुओं को खुले में शौच कर शर्मसार होना पड़ रहा है। कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए मन्दिर ट्रस्ट की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मन्दिर महन्त जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि मन्दिर में सीसी टीवी कैमरे से चेन स्नेचर और जेबकटों पर नजर रहेगी। पुलिस ने वाच टावर नहीं बनाये हैं। समाचार लिखे जाने तक मोटर वोट के साथ पीएसी नहीं पहुंच सकी थी। मेला क्षेत्र में भीड़ के दबाव के बीच जाम के हालात बने रहे। पुलिस की व्यवस्था न होने के कारण श्रद्घालुओं को दिक्कतो का सामना करना पड़ा।
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