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नागा साधुओं ने किया दूसरा शाही स्नान

Tue, 15 Nov 2016 01:00 AM IST
नागा साधुओं ने किया दूसरा शाही स्नान
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नागा साधुओं ने किया दूसरा शाही स्नान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बटेश्वर को पांचवें महाकुंभ का दर्जा दिलाने के लिए शुरू हुई शाही स्नान की परंपरा का सोमवार को अव्यवस्थाओं के बीच निर्वहन किया गया। जूना अखाडे़ के महामण्डलेश्वर बाबा बालक दास के नेतृत्व में शाही स्नान को निकले संत महात्माओं को मार्ग पर कंकड़ और कांटों से होकर गुजरना पड़ा। पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था भी बेहतर नहीं थी। 
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सोमवार को सुबह आठ बजे दूसरे शाही स्नान के लिए बटेश्वर के विभिन्न अखाड़ों से साधु-सन्त निकले। विभिन्न मन्दिरों में दर्शन पूजन के साथ सास कोस की परिक्रमा की। परिक्रमा मार्ग की सफाई की मांग पहले शाही स्नान के दौरान की गई थी। बावजूद इसके जिला पंचायत ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इसलिए मार्ग पर बिखरे पडे़ कंकड़ और कांटों से होकर गुजरे साधु सन्तों के पैर लहूलुहान हो गये। परिक्रमा मार्ग पर सुरक्षा की व्यवस्था भी ठीक नहीं थी। घुड़सवार पुलिस की कमी देखने को मिली। शाही स्नान के बाद साधु सन्तों ने ब्रह्मलाल जी मन्दिर में अनुष्ठान किया। इसके बाद साधु सन्तों ने अपने अस्त्र-शस्त्रों का प्रदर्शन किया। आखिर में शाही स्नान की अव्यवस्थाओं को लेकर बाबा बालक दास ने नाराजगी जताई। 

बटेश्वर: कार्तिक पूर्णिमा पर उमड़ा आस्था का सैलाब 
बाह। कार्तिक पूूर्णिमा की पावन बेला पर सोमवार को बटेश्वर तीर्थ में स्नान, दर्शन, पूजन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। कृतिका और भरणी नक्षत्र के अद्भुत संयोग के दौरान श्रद्घालुओं ने यमुना नदी में स्नान किया। ब्रह्मलाल जी मन्दिर में दर्शन पूजन अनुष्ठान किये। दिन भर चले स्नान दर्शन के दौरान बटेश्वर तीर्थ हर-हर बम-बम और घंटों की घनघनाहट से गूंजता रहा। 
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रविवार की शाम से ही बटेश्वर में कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए श्रद्घालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। मध्य रात्रि में शिव मन्दिर शृंखला के घाटों पर श्रद्घालुओं की भीड़ का इतना दबाव बढ़ गया कि ब्रह्मलाल जी मन्दिर के पट खोलने पड़े। मन्दिर महन्त जय प्रकाश गोस्वामी ने बताया कि मध्य रात्रि से ही दर्शन, पूजन और स्नान का सिलसिला शुरू हो गया। जो सांझ ढले तक जारी रहा। बटेश्वर के सभी मन्दिरों में अनुष्ठान हुये। कृतिका और भरणी नक्षत्र के संयोग के कारण श्रद्घालुओं ने विशेष अनुष्ठान भी कराये। पुलिस प्रशासन की लचर व्यवस्था के चलते मेला से लेकर घाटों तक, खांद से लेकर बटेश्वर के प्रवेश द्वार तक और मुख्य मार्ग से लेकर मन्दिर के अन्दर तक श्रद्घालुओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। मेले में अव्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय श्रद्घालुओं ने अपनी-अपनी परेशानी बर्ताईं। 
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