कासगंज। गंगा की धारा से कटान की मार झेल रहे 5 हजार की आबादी वाले बरौना गांव के अस्तित्व पर संकट था, लेकिन गांव के अस्तित्व को बचाने में फिलहाल सिंचाई विभाग को कामयाबी मिली है। 16 दिन तक युद्धस्तर पर कटानरोधी कार्य करके धारा के पूरे कटानक्षेत्र को परक्यूपाइन स्टड व सैंड बैग से बंद कर दिया गया है। कटानरोधी कार्य बृहस्पतिवार को पूरा हो गया। ग्रामीणों ने भी फिलहाल कटान का खतरा टल जाने से राहत महसूस की है। ग्रामीणों का कहना है कि अब इस समस्या के स्थायी समाधान की जरूरत है।
बरौना में कटान का संकट वैसे तो पिछले साल से शुरू हो गया था, लेकिन यह संकट जुलाई माह से तेज हुआ। कुछ ही दिनों में किसानों की खेती की जमीनें गंगा में समां गईं। कटान की गति इतनी तेज थी कि 2 अगस्त तक गांव की सड़क जो गंगा की धारा से गांव की सुरक्षा कर रही थी वह भी कट गई। गंभीर हालातों को देख जिलाधिकारी हर्षिता माथुर के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने 16 दिन तक दिन रात बरौना गांव में रहकर काम किया। बल्ली पाइलिंग करके करीब 1500 बल्लियां कटान प्रभावित इलाके में स्थापित की गईं। 225 परक्यूपाइन स्टड स्थापित किए गए और करीब 200 ट्रॉली पेड़ों के झाड़, नाइलॉन क्रेट, 70 हजार सैंड बैग लगाए गए। बृहस्पतिवार को सिंचाई विभाग ने अपना काम पूरा कर लिया अब गांव की निगरानी का काम किया जाएगा।