तीर्थनगरी वृंदावन में भक्त इस बार अपने आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के चरण दर्शन नहीं कर सकेंगे। साल में एक बार होने वाले ठाकुरजी के चरण दर्शन अक्षय तृतीया पर होते हैं। 26 अप्रैल को अक्षय तृतीया है, लेकिन लॉकडाउन के कारण ठाकुर बांकेबिहारी समेत सभी मंदिरों के पट बंद हैं। हालांकि सेवायतों ने चरण दर्शन की तैयारियां जरूर शुरू कर दी हैं।
ग्रीष्म ऋतु में अक्षय तृतीया का पर्व होता है। ब्रज में यह पर्व महत्वपूर्ण इसलिए है, क्योंकि इसी दिन ठाकुर बांकेबिहारी के चरण दर्शन भी होते हैं। साल में एक बार चरण दर्शन के लिए वृंदावन में भक्तों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो सकेगा।
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन में मंदिरों के पट बंद हैं। हालांकि बांकेबिहारी मंदिर में गोस्वामी समाज ने चरण दर्शन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। गोस्वामी समाज ने चंदन घिसना शुरू कर दिया है। ऐसा इसलिए कि अक्षय तृतीया पर चंदन का लेप ठाकुरजी को किया जाता है।
दरअसल, चंदन का लेप केवल ठाकुरजी को गर्मी से बचाने के लिए होता है। सतुआ के लड्डू, खरबूज और तरबूज का भोग लगाया जाता है। साथ ही चंदन का गोला प्रदान किया जाता है। इस दिन बांकेबिहारीजी को धोती (अचला) धारण कराया जाता है।
स्वामी हरिदास ने कराए थे ठाकुरजी के विशेष दर्शन
बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत गोपी गोस्वामी ने बताया कि अक्षय तृतीया से सतयुग का प्रारंभ हुआ। इसी दिन भगवान परशुरामजी का प्राकट्य हुआ। बद्रीनाथ के कपाट भी इस दिन ही खुलते हैं।
काफी वर्ष पूर्व स्वामी हरिदास ने बद्रीनाथ जाते हुए लोगों को रोककर कहा कि वृंदावन में ही विशेष दर्शन कराता हूं। उन्होंने ठाकुर बांकेबिहारीज के शृंगार करके आलौकिक चरणों और सर्वांगीण दर्शन कराए तो सभी स्तब्ध रह गए। उसी दिन से यह विशेष दर्शन होते हैं।
बांकेबिहारी धारण करेंगे पाजेब
सेवायत सुनील गोस्वामी (बड़े लाला) ने बताया कि अक्षय तृतीया पर ठाकुरजी को चंदन के लेपन के संग ही पाजेब भी धारण कराई जाती है। धोती (अचला) में ठाकुरजी के विशेष चरणों के दर्शन होते हैं, जो कि साल में एक बार ही होते हैं।
शीतलता प्रदान करने को सतुआ के लड्डू, खरबूज, तरबूज आदि का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन कोई भी कुंवारी कन्या ठाकुरजी को पाजेब अर्पित करती है तो उसका विवाह बहुत ही जल्दी होता है।
वृंदावन का सबसे बड़ा पर्व है अक्षय तृतीया
सेवायत श्रीवर्धन गोस्वामी ने बताया कि वृंदावन का सबसे बड़ा पर्व अक्षय तृतीया है। इस दिन स्नान और पुण्य का महत्व हैं। ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने के लिए भक्त शीतल पदार्थ प्रदान करता है।
साल में एक बार चरणों के दर्शन के लिए वृंदावन में ऐसी भीड़ उमड़ती है कि व्यवस्थाएं संभाले नहीं संभलती। अबकी बार लॉकडाउन के कारण भक्त अपने आराध्य के चरण दर्शन नहीं कर सकेंगे।