बैंक प्रबंधक आरके सिंह ने ग्राम पंचायतवार खाताधारकों की संख्या जुटाई। पाया गया है कि घोटालेबाज अर्जुन ने 3900 उपभोक्ताओं के खाते खोले और लेनदेन किया। सभी खाताधारकों को फर्जी पासबुक जारी की। ग्राहक सेवा केंद्र पर पासबुक जारी नहीं होती बल्कि उन्हें कार्ड मिलता है।
किसी भी उपभोक्ता को कार्ड नहीं दिया गया। ब्यौरा में देखा गया है कि ग्राहक सेवाकेंद्र गोरहा की आईडी से जालसाल ने 20 फरवरी 2017 को अंतिम बार लेनदेन किया, लेकिन खातों में उसके बाद भी लेनदेन होता रहा। पासबुक से हस्तलिखित एंट्री लेनदेन का प्रमाण बनी है।
जांच टीम ने माना है कि कहीं न कहीं अन्य ग्राहक सेवा केंद्रों की मिलीभगत से अर्जुन अपने फिंगर प्रिंट से खातों से लेनदेन करता रहा। ऐेसे में अन्य सेवा केंद्र भी कार्रवाई की जद में आए हैं।
- ग्राहक सेवा केंद्र सिर्फ लेनदेन कर सकता है।
- बैंक द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं का प्रसार कर सकता है।
'बैंक प्रबंधक और जीरो मास कंपनी के अधिकारियों के साथ बैठक की। सभी का सहयोग मांगा है। भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण शाखा से ग्राम पंचायतवारपूरा ब्यौरा खंगाल रहे हैं। बिंदुवार जांच की जा रही है।- महेश प्रकाश, एलडीएम।
'ग्राहक सेवा केंद्र के लेनदेन से बैंक का कोई हस्तक्षेप नहीं होता। केंद्र सिर्फ त्रिकोणीय समझौता है जो बैंक, कंपनी और केंद्र संचालक के बीच होता है।जांच में पाया है कि 3900 खाते ग्राहक सेवा केंद्र में खोले गए।'- आरके सिंह, प्रंबधक, एसबीआई ग्रामीण शाखा।