तरह-तरह की खेती कर किसान किस्मत आजमाने में लगे हुए हैं। ऐसे में उनकी किस्मत को चमकाने का काम कर रही है केले की खेती। रकबा जरूर कम है, लेकिन उन्नति की संभावनाएं अपार मिली हैं। जिले में कई किसान केले की खेती कर रहे हैं। इस खेती की विशेषता है कि एक बार फसल बोई जाती है और चार बार केले का फल आता है। सबसे अहम बात है कि हर साल इस फसल की लागत कम होती है और आमदनी बढ़ जाती है।
पटियाली के किसानाें में केले की खेती के प्रति जागरूकता दिखाई दी है। यहां उद्यान विभाग ने किसानों को इस खेती के लाभ बताए तो किसान जागरूक हो उठे। इसके बाद किसानों ने केले की खेती की शुरुआत कर दी। पटियाली क्षेत्र के किसान हरिकिशन का कहना है कि इस खेती के लिए एक बार केले के पौधे रोपे जाते हैं। उसके बाद चार बार फसल मिलती है।
हर साल केले का फल तैयार हो जाता है तो फल को निकाल लेते हैं और पौधे खड़े रहने देते हैं। फिर से फल आ जाता है। पहली बार में जब फसल रोपते हैं, तब पौधे आदि पर व्यय के कारण लागत अधिक आती है और फिर अगली चार फसलों तक के लिए पौधा नहीं रोपना पड़ता। हर बार फल का वजन बढ़ ही जाता है। ऐेसे में हर साल लागत कम होती जाती है और आमदनी बढ़ती जाती है। यदि किसान इस फसल में रुचि दिखाएं तो बेहद लाभ मिलेगा।
प्रति हेक्टेयर लागत और आमदनी
- 1 लाख रुपये पहली बार फसल रोपने में आती है लागत।
- 3 लाख रुपये तक पहली फसल तैयार होने पर होता है मुनाफा।
- 50 हजार रुपये तक दूसरी फसल से चौथी फसल तक प्रति फसल आती है लागत।
- 3 से 3.5 लाख रुपये तक दूसरी से चौथी फसल तक प्रति फसल होती है आमदनी।
आंकड़ों की नजर में
- 14 महीने में तैयार होती है एक फसल।
- 30 हजार रुपये पहली फसल के लिए अनुदान देता है उद्यान विभाग।
- 10 हजार रुपये दूसरी से चौथी फसल तक मिलता है अनुदान।
- 25 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही जिले में हो रही खेती।
जिले में फल की फसल, सब्जी की नहीं
केले की फसल दो प्रकार की होती है। एक प्रजाति की फसल सब्जी के लिए पैदा की जाती है और एक प्रजाति की फसल फल के लिए। जिले में फल के लिए किसान फसल कर रहे हैं, हालांकि सब्जी के लिए अभी जागरूकता नहीं हैं।
केले की फसल बेहद लाभकारी है। एक बार रोपने से चार बार तक फल आता है। पहली बार में लागत अधिक आती है। फिर हर साल लागत कम होती जाती है। पहली बार में पौधे पर खर्च होता है। फिर हर साल पत्ता गिरता है तो हरी खाद बनती है। इससे हर साल खाद पर भी कम खर्च आता है। - योगेश कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।