मैनपुरी। पशुओं में लंपी रोग के खतरे को लेकर शासन ने अलर्ट रहने के आदेश जारी किए हैं। जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने भी पशु मेलों के आयोजन और पशुओं के गैर जिलों से आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया है। लोगों से सतर्क रहने को कहा है।
जिलाधिकारी ने बताया कि लंपी रोग गोवंश और महिषवंशीय पशुओं में फैलता है। बढ़ते खतरे को देखते हुए जिले में आयोजित होने वाले पशु बाजार और मेलों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिले से पशुओं के आवागमन पर भी प्रतिबंध है। उन्होंने बताया कि विशेषकर पश्चिम से पूर्व की ओर जा रहे पशुओं को हाईवे, चेकपोस्ट, पुलों आदि पर निगरानी करते हुए रोका जाए।
उन्होंने गोशालाओं में नया गोवंश संरक्षित न करने के आदेश भी नगर निकाय और खंड विकास अधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिले की किसी भी ग्राम पंचायत, न्याय पंचायत में पशुपालक के गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं में विषाणुजनित बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो तत्काल सूचित करें। इसके लिए पशुपालन विभाग में जिला स्तर पर संचालित कंट्रोल रूम के मोबाइल नंबर 9452945076 और 9412225422 पर तत्काल सूचित करें।
ऐसे करें रोग के पीड़ित पशु की पहचान
पशुपालन विभाग ने लंपी रोग से पीड़ित पशुओं की पहचान के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। रोग में पशु को तेज बुखार, आंख, नाक से पानी गिरना, पैरों में सूजन, पूरे शरीर में कठोर एवं चपटी गांठ आदि प्रकार के लक्षण पाए जाते हैं। कभी-कभी संपूर्ण शरीर की चमड़ी विशेष रूप से सिर, गर्दन, थनों के बीच के भाग पर गांठों के उभार बन जाते हैं। धीरे-धीरे पूरा शरीर गांठों से ढक जाता है। रोग से पीड़ित पशु का शरीर धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है और अत्याधिक कमजोरी से पशु की मृत्यु भी हो सकती है। गाभिन पशुओं में गर्भपात हो सकता है, दुधारू गायों में दूध उत्पादन काफी कम हो जाता है।
ये बरतें सावधानियां
पशुपालन विभाग ने अपील की है अगर किसी भी पशु में लंबी रोग के लक्षण नजर आते हैं तो तत्काल निकटतम पशु चिकित्साधिकारी को सूचित करें।प्रभावित पशु को स्वस्थ्य पशु से अलग करें। पशु के दूध को उबाल कर पियें और पशुओं को मच्छरों, मक्खियों, किलनी आदि से बचाने के लिए कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करें। पशुबाड़े और पशु खलिहान की फिनायल, सोडियम हाइपोक्लोराइट इत्यादि का छिड़काव करें। पशु की मृत्यु होती है तो शव को खुले में न फेकें।