मुस्लिम इलाकों में कुर्बानी के त्योहार के लिए सबसे ज्यादा बकरों की कुर्बानी दी जाती है। दुंबा को पाक माना जाता है, लेकिन भेड़ और भैंसे की कुर्बानी का चलन है। कई लोग मिलकर एक भैंस खरीदते हैं और फिर उसकी कुर्बानी दी जाती है। भैंसे में पांच से छह तक हिस्सेदार हो जाते हैं। नदीम नूर बताते हैं कि इस बार भैंसे की कुर्बानी ज्यादा दी जाएंगी।
ताजगंज की मंडी हो या फिर हींग की मंडी, शहजादी मंडी और सदर भट्ठी यहां एक सप्ताह से पशु कारोबारी बकरे लेकर पहुंच रहे हैं। पशु व्यापारी शमीम ने बताया कि पलवल से आए हैं। 25 बकरे लाए थे, सभी बिक गए। इमरान को टीला अजमेरी खां के व्यक्ति ने डेढ़ लाख रुपये में खरीदा। वह बरबरी नस्ल का था। इसी तरह लोहामंडी बाजार में आफताब नामक बकरे की कीमत एक लाख रुपये लगाई गई।
इसे भी खरीद लिया गया। बुधवार की शाम तक बकरों की खरीदारी होगी। हिंदुस्तानी बिरादरी के अध्यक्ष डॉ. सिराज कुरैशी बताते हैं कि कुर्बानी का सिलसिला तीन दिन चलता है। सोमवार को बकरों की एक जोड़ी 1.14 लाख रुपये में बेची गई। उन्होंने कहा कि लोग बकरों या अन्य पशुओं की कुर्बानी के बाद उनकी खाल और अवशेष को सड़कों पर नहीं फेंके। ईद भाईचारे का त्योहार है। इसे सादगी और उत्साह के साथ मनाएं।