आगरा। किताबों से भरे बैग उठाने वाली बेटियों के कंधे पर क्रिकेट किट दिखने लगी है। आंखों में सपने संजोकर और हाथ में बल्ला लेकर वह आत्मविश्वास के साथ पिच पर चौका- छक्का लगा रही हैं। विश्वकप क्रिकेट विजेता दीप्ति शर्मा से प्रेरित इन महिला क्रिकेट खिलाड़ियों का जोश बढ़ गया है। शहर में करीब 35 क्रिकेट अकादमियां हैं, जिनमें 150 लड़कियां शामिल हैं जो क्रिकेट के मैदान पर खुद को तपाने में जुटी हुई हैं।
महिला क्रिकेट टीम के विश्वकप जीतने के बाद क्रिकेट को लेकर खिलाड़ियों का जुनून और बढ़ रहा है। जो बेटियां घर की चहारदीवारी तक सीमित थीं, वह मैदान में नजर आ रही हैं। क्रिकेट की दुनिया में नया अध्याय लिख रहीं बेटियां दीप्ति शर्मा की तरह बनना चाहती हैं। उनके सपने को पूरा करने के लिए उनके अभिभावक भी पूरी मेहनत से जुटे हैं। बेटियों के साथ क्रिकेट मैदान पर वह भी आ रहे हैं और बिटिया के प्रशिक्षण पर पूरी नजर रखकर उनकी खामियों और विशेषज्ञता पर अपनी राय भी दे रहे हैं।
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कई महिला खिलाड़ी ऐसी भी हैं जो अच्छा क्रिकेट खेलती हैं। आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण खेलने में असमर्थ थीं। हम उनका सहयोग करके ऊंचे स्तर तक ले जाना चाहते हैं। - दया शंकर, क्रिकेट कोच, फतेहाबाद
मैं भी दीप्ति शर्मा जैसी बनना चाहती हूं। क्रिकेट टीम के विश्व कप जीतने के बाद धारणा बदलेगी कि लड़कियां लड़कों से कम नहीं है। इस जीत से महिला क्रिकेट को प्रोत्साहन मिलेगा। - श्रुति गौर, फतेहाबाद
पहले सोचते थे क्रिकेट सिर्फ लड़कों का खेल हैं लेकिन जब पापा ने मुझे क्रिकेट खेलना सिखाया तो मैं निरंतर खेलने का प्रयास करती गई। अब मैं प्रदेश स्तर पर खेल रही हूं। - कल्पना लोधी, शमशाबाद
मेरे मम्मी-पापा क्रिकेट खेलने के लिए पूरा समर्थन करते हैं। पढ़ाई के साथ क्रिकेट का अभ्यास कर रही हूं। मेरा सपना है कि मैं भी देश की क्रिकेट टीम का हिस्सा बनूं और आगरा का नाम रोशन कर सकूं- वंशिका सिंह राजपूत, शमशाबाद