ताजमहल और आगरा किला के बीच प्रो पूअर टूरिज्म डेवलपमेंट के नाम पर प्रदेश सरकार स्काई वॉक बनाने की योजना तैयार कर चुकी है, जो शाहजहां गार्डन से किले के बीच बनाया जाएगा। इसी योजना में शाहजहां गार्डन के अंदर से वॉकवे बनाया जाएगा, जो किले और ताजमहल को जोड़ेगा। 50 करोड़ रुपये की योजना स्काई वॉक और वॉक वे के नाम पर अफसरों ने बना ली, लेकिन शाहजहां गार्डन में साल भर पहले नौ करोड़ रुपये के जो काम हुए, उन खस्ता हालत पर नजर नहीं है। मतलब साफ है, केंद्र सरकार की मदद से शाहजहां गार्डन में बनाए गए स्टोन पाथवे को ही फिर से वॉकवे की योजना में शामिल कर वर्ल्ड बैंक के 50 करोड़ ठिकाने लगाए जाएंगे।
केंद्र सरकार ने दिए थे नौ करोड़ रुपये
केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने शाहजहां पार्क के विकास के लिए नौ करोड़ रुपये यूपी टूरिज्म को दिए थे। यूपी राजकीय निर्माण निगम को सेंड स्टोन पाथवे व पेरीफेरल पाथवे का निर्माण, सजावटी लाइटिंग, छह रेन वाटर हार्वेस्टिंग के टैंक, प्लांटेशन, 100 बेंच का निर्माण, तीन शुलभ शौचालय का निर्माण, फव्वारे की स्टोन रेलिंग का निर्माण, तालाब के लिए पैडल वोट की व्यवस्था करनी थी। इनमें से जो भी काम हुए, वह तुरंत ही टूटने भी शुरू हो गए।
उखड़ गया पाथवे, टूट गईं लाइटें
एक साल में ही पाथवे उखड़ गया, जबकि रेलिंग टूट गई। बेंचें सलामत नहीं हैं, जबकि कई बनाई ही नहीं गईं। नौ करोड़ खर्च के बाद भी स्थिति पहले की तरह ही है। पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने निर्माण में घटिया निर्माण सामग्री इस्तेमाल किये जाने की शिकायत की थी। उसी के बाद टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी बनाई गई। पर्यटन मंत्री ने कमेटी को जांच के आदेश भी दिए, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
ताज और किले के बीच पर्यटक सड़क पर पैदल न चलकर शाहजहां गार्डन की हरियाली के बीच चल पाएंगे। वर्ल्ड बैंक की मदद से वॉकवे की योजना है, जिसमें किले के पास गार्डन से पुल बनाया जाएगा। यह एस्कलेटर होगा।
दिनेश कुमार
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
यूपी टूरिज्म
जार्ज पंचम ने किया था प्रतिमा का अनावरण
ताजमहल से किले के बीच ऊसर ऊबड़-खाबड़ टीलों पर बनाए गए पार्क को सबसे पहले एंटोनी मैकडोनाल्ड पार्क नाम दिया गया था। 1895 से 1901 तक नार्थ वेस्टर्न प्रोविंस आगरा एंड अवध के लेफ्टिनेंट गवर्नर मैकडोनाल्ड रहे थे। 1901 में महारानी विक्टोरिया की मौत के बाद ब्रिटिश सरकार ने महारानी की प्रतिमा इसी पार्कमें लगवाई और यह पार्कविक्टोरिया पार्कके नाम पर हो गया। तब इंग्लैंड से जार्ज पंचम और क्वीन मैरी विक्टोरिया पार्क में लगी महारानी की प्रतिमा का अनावरण करने आए थे। इसी पार्क में मुगलकालीन चार हवेलियां जीर्णशीर्ण हालत में थी, जिन्हें हटाकर यह पार्कबनाया गया था। आजादी के बाद महारानी विक्टोरिया की प्रतिमा हटवाकर संगमरमर से बनी पं. मोतीलाल नेहरू की प्रतिमा रखवा दी गई। उसके बाद यह शाहजहां पार्क के नाम से चर्चित हुआ। महारानी विक्टोरिया की प्रतिमा अब पालीवाल पार्कके सिटी म्यूजियम के बाहर धूल फांक रही है।