आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में स्टिच लेस स्पाइन सर्जरी अंडर लोकल एनीस्थिसिया, जिसका खर्च डेढ़ से दो लाख रुपये आता है, वो अब मुफ्त में होगी। इस सर्जरी से उन मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, जो कमर और पैर में दर्द या सुन्नपन की समस्या से परेशान हैं।
कमर-पैरों में दर्द और सुन्नपन की समस्या है। एसएन मेडिकल कॉलेज में बिना आॅपरेशन किए 40 मिनट में ठीक होगा। यहां डिस्क प्रोलैप्स की सर्जरी शुरू हो गई है। 24 मरीजों पर ट्रायल के बाद हर बुधवार को विशेष ओपीडी शुरू कर दी है। प्रदेश का ये पहला मेडिकल कॉलेज है, जहां ये सुविधा है।
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हड्डी रोग विभाग के डॉ. बृजेश शर्मा ने बताया कि डिस्क प्रोलैप्स के चलते कमर-पैरों में दर्द और सुन्नपन-झनझनाहट की परेशानी होने लगती है। इसे साइटिका भी कहते हैं। ये रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानी है। इसमें चोट लगने, अत्यधिक भार उठाने और आगे झुकने से रीढ़ की हड्डी के अंदर गद्दी के फूलकर नस पर दबाव डालती है। इससे कमर में दर्द शुरू होता है जो धीरे-धीरे पूरे पैर तक पहुंच जाता है। मर्ज बढ़ने पर सुन्नपन, झनझनाहट और पैरों में कमजोरी आने लगती है।
इसकी सर्जरी करने के लिए 6-7 मिलीमीटर का छिद्र कर एंडोस्कोपी की मदद से रीढ़ की नस को दबाने वाली अतिरिक्त गद्दी को हटा देेते हैं। स्वस्थ गद्दी और हड्डी नहीं काटी जाती। मरीज को पूर्ण बेहोश करने की जरूरत नहीं पड़ती है। इस सर्जरी को स्टिच लेस स्पाइन सर्जरी अंडर लोकल एनीस्थिसिया (एसएसयूएलए) कहते हैं। इस प्रक्रिया में करीब 40 मिनट लगते हैं। 24 घंटे में ही मरीज को छुट्टी दे दी जाती है। अभी चुनिंदा निजी अस्पतालों में ही ये सर्जरी हो रही है, इसका खर्च डेढ़ से दो लाख रुपये है।
एसएन में यह निशुल्क हो रहा है। 24 मरीजों पर सफल प्रयोग होने के बाद ओपीडी शुरू कर दी है। हर बुधवार को हड्डी रोग विभाग की ओपीडी नंबर-7 में मरीज दिखा सकते हैं। हड्डी रोग विभाग के डॉ. केएस दिनकर और डॉ. रजत कपूर ने बताया कि पूर्व में मरीज की रीढ़ की हड्डी के पास करीब 5 इंच का चीरा लगाना पड़ता था। हड्डी भी काटनी पड़ती है। लेकिन अब एक छिद्र से सर्जरी हो रही है, इसमें टांका लगाने की भी जरूरत नहीं है।