आगरा में यमुना नदी के बायीं ओर चीनी का रोजा के बाद है एत्माद-उद-दौला का मकबरा, जिसे मुगल बादशाह जहांगीर की बेगम नूरजहां ने अपने पिता की याद में बनवाया था। यह पहला मकबरा है, जिसमें पहली बार संगमरमर में पच्चीकारी का काम किया गया है। इसको ताज के निर्माण के लिए प्रेरणास्रोत माना जाता है। इसीलिए बेबी ताज का नाम दिया गया।
बेबी ताज के नाम से मशहूर सम्राज्ञी नूरजहां का कला केंद्र निगहबानों की मेहरबानी के लिए तरस गया है। 17 एकड़ में फैला यह स्मारक मुगल, फारसी व ईरानी कला का इतिहास समेटे हुए है। मुख्य मकबरा में छिपी ईरान, फारस और हिंदु वास्तुकला संरक्षण के अभाव में मिट रही है। स्मारक का प्रचार भी नहीं है। ऐसे में कद्रदान भी इससे दूर हैं। जहां ताज देखने के लिए रोज औसतन 20,000 पर्यटक आगरा आते हैं, वहीं यमुना तट पर बने सफेद संगमरमर के बेबी ताज यानी एत्माउद्दौला में रोज 200 पर्यटक भी नहीं पहुंचते।
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मुगल शहंशाह जहांगीर की बेगम नूरजहां ने अपने पिता मिर्जा ग्यास बेग की याद में इसे बनवाया था। मिर्जा ग्यास बेग मुगल दरबार में कोषाधिकारी थे। बाद में वजीर बन गए। 1622 में उनकी मृत्यु हो गई। 1628 में एत्माउद्दौला बना। मिर्जा ग्यास बेग को एत्माउद्दौला की उपाधि मिली थी। इसका मतलब होता है ईमानदार।
ताजमहल से 25 साल पहले बने इस मकबरा के जर्रे-जर्रे में नूरजहां की कला है। चार बाग के बीच 149 फुट वर्ग में बना आयताकार मकबरा सफेद संगमरमर पर की गई नक्काशी से ढका है। मकबरे के दरवाजों से लेकर कब्र के गुंबद, फर्श और दीवारों पर खूबसूरत नक्काशी और चित्रकारी है, जो ताजमहल में की गई नक्काशी से कम नहीं है। ताज का ही अक्स दिखती है। सजावट की डिजाइन नूरजहां ने बनाई, जिन्हें कलाकारों ने मकबरा में सजाया। गुंबद के ऊपर संगमरमर पर कुरान की आयतें खुदी हैं। गुंबद के लिए तब ईरान से गोल्ड पेंट लाया गया था।
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संरक्षण के अभाव में मिट रही कला
मुख्य मकबरा में छिपी ईरान, फारस और हिंदु वास्तुकला संरक्षण के अभाव में मिट रही है। सीमेंट पर नक्काशी से लेकर कब्र के पत्थरों से निशान गायब हो रहे हैं। एत्माउद्दौला संरक्षण सहायक रवि प्रताप मिश्रा का कहना है कि मकबरे में हुए काम के संरक्षण के लिए प्रस्ताव बन है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) इसे संरक्षित करता है।
परिवार के 8 सदस्यों की कब्रें
एत्मद्दौला स्मारक में नूरजहां के पिता मिर्जा ग्यास बेग और मां हसमत बेगम के अलावा चाचा असद, नूरजहां की बेटी लाड़ली बेगम, भाई आसिफ खान व दीवान बेगम के अलावा नूरजहां के पालक बैरम खां सहित 8 सदस्यों की कब्र हैं। मुख्य गुंबद की 8 कब्रों के अलावा नौवीं मजार दक्षिणी गेट के पास बाबा अब्दुला शाह की है।
आगरा किला, सिकंदरा और ताजमहल के बाद चौथा सबसे बड़ा स्मारक बेबी ताज कमाई के मामले में बदहाल है। वर्ष 2015 से 2022 तक जहां ताजमहल ने 334 करोड़ रुपये कमाए हैं, वहीं बेबी ताज ने महज 10.32 करोड़ रुपये ही पिछले सात साल में कमाए। 12.78 लाख पर्यटक यहां 2015 से 2022 तक आए।