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Agra News: जन्म के बाद बचाए जा रहे घड़ियाल शिशु, नदी में तैरने का कर रहे अभ्यास

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चंबल नदी में घड़ियाल की थूथन के सहारे तैरने में माहिर हो रहे ​शिशु। संवाद 
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बाह। चंबल सेंक्चुअरी की बाह रेंज में पिछले माह हैचिंग में जन्में शिशु घड़ियाल की थूथन के सहारे तैरने में माहिर हो रहे हैं। बाह रेंज में मार्च-अप्रैल में घड़ियालों की नेस्टिंग हुई थी। मई के आखिर और जून के पहले सप्ताह में हैचिंग हुई थी।
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रेंजर कुलदीप सहाय पंकज ने बताया कि बाह रेंज में 1710 घड़ियाल शिशुओं का जन्म हुआ था। घड़ियाल शिशुओं के 5 फीसदी ही जीवित रहने की धारणा है। जन्म के बाद से ही घड़ियाल शिशुओं के जीवित रहने की दर बढ़ाने के लिए बाह रेंज में वन विभाग की टीम नियमित रूप से कॉम्बिंग कर रही है। शिशुओं को जंगली जानवर आदि से बचाने में विभागीय अमला जुटा है। वहीं शिशु जीवित रहने की क्षमता बढ़ाने के लिए नदी में तैरने को अभ्यस्त हो रहे हैं। घड़ियाल के माथे पर बैठने एवं थूथन के सहारे गहरे पानी में तैरने में माहिर हो रहे घड़ियाल शिशुओं की मनमोहक तस्वीरें सामने आईं हैं। रेहा के प्रधान अजय कौशिक, सिमराई के प्रधान जयवीर सिंह ने बताया कि नदी के किनारे से लेकर गहरे पानी तक घड़ियाल के साथ शिशुओं की जलक्रीड़ा ग्रामीणों को मुग्ध कर देती है।
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